
*वैशाख पूर्णिमा पर हुआ भागवत कथा का दिव्य समापन*

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सप्ताह भर चला श्रीमद्भागवत भक्ति का चरम उत्सव , पूर्णिमा को हुआ विशाल नगर भंडारा
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम में पूज्य गुरुवरों की पावन स्मृति में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का शुक्रवार 01 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्तिमय वातावरण में दिव्य समापन हुआ ।
श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ 25 अप्रैल से लगातार 01 मई 2026 तक आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन में सप्ताह भर श्रीमद्भागवत भक्ति , ज्ञान और वैराग्य की अमृतधारा अविरल प्रवाहित होती रही । कथा के अंतिम दिवस वैशाख पूर्णिमा पर आश्रम परिसर श्रद्धा , भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा ।
कथा व्यास आचार्य श्री राममूर्ति मिश्रा जी ने प्रतिदिन दोपहर 03 बजे से सायं 06 बजे तक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया । कथा के माध्यम से उन्होंने धर्म , भक्ति , ज्ञान और वैराग्य के गूढ़ प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जिसे सुनने प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु , भक्तजन उपस्थित हो रहे थे । कथा श्रवण कर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होते रहे ।
पूरे सप्ताह आश्रम परिसर में श्रीहरि नाम संकीर्तन , सत्संग , भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक चिंतन का वातावरण निरंतर बना रहा । भक्तों की उपस्थिति से आश्रम परिसर भक्तिमय और आध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत दिखाई दिया ।
यह पुण्य आयोजन पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य एवं आशीर्वाद में तथा परमेष्ठी सद्गुरुओं स्वामी एकरसानंद सरस्वती जी महाराज , स्वामी भजनानंद सरस्वती जी महाराज एवं स्वामी शारदानंद सरस्वती जी महाराज की पावन स्मृति को समर्पित रहा । “सर्वभूत हिते रताः” के दिव्य संदेश के साथ यह आयोजन समाज में सेवा , करुणा , धर्म और मानवता के मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ ।
समापन दिवस पर विधिवत पूर्णाहुति , संत समागम एवं विशाल नगर भंडारे का आयोजन किया गया । पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर नगरवासियों , श्रद्धालु भक्तों एवं क्षेत्रीय जनों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और पुण्य लाभ अर्जित किया ।
वैशाख पूर्णिमा पर संपन्न इस दिव्य आयोजन ने अमरकंटक की पावन भूमि को एक बार पुनः भक्ति , श्रद्धा और सनातन संस्कृति के प्रकाश से आलोकित कर दिया ।
