
*जिले के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान*

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*जिले के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान*
*85 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले 179 छात्र-छात्राओं को कलेक्टर ने किया प्रोत्साहित*
**कोंडागांव, 1 मई 2026/** जिले में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने हेतु विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। वर्ष 2025-26 की बोर्ड परीक्षाओं में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर दसवीं एवं बारहवीं कक्षाएं उत्तीर्ण करने वाले 179 मेधावी छात्र-छात्राओं को कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना द्वारा जिला कार्यालय में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में कलेक्टर ने विद्यार्थियों को शाल, श्रीफल, पेन एवं डायरी भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी इसी लगन के साथ अध्ययन जारी रखने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया।
कलेक्टर ने कहा कि जिले के विद्यार्थियों की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने शिक्षकों एवं अभिभावकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की सफलता में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री चित्रकांत चार्ली ठाकुर, जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती प्रधान, डीएमसी श्री ईमल बघेल सहित जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।
*दूरस्थ क्षेत्र की बेटियां मेहनत और हौसले से हुए सफल*
दूरस्थ क्षेत्र कोंगुड़ स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल की छात्रा कुमारी यशोदा राठौर, ग्राम बारदा निवासी, ने कक्षा 12वीं में 90.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। यशोदा ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता एवं शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत और परिवार के प्रोत्साहन से यह सफलता संभव हो सकी। यशोदा ने कहा कि उन्होंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और दृढ़ संकल्प के साथ पढ़ाई जारी रखी।
इसी तरह उनकी छोटी बहन सुनीता राठौर ने कक्षा 10वीं में 95.16 प्रतिशत अंक अर्जित कर जिले और क्षेत्र का नाम रोशन किया। सुनीता ने बताया कि उन्होंने शुरुआत से ही लक्ष्य निर्धारित कर पढ़ाई की। किसी भी विषय में शंका होने पर वे विद्यालय में शिक्षकों से समाधान प्राप्त करती थीं और घर लौटकर नियमित पुनरावृत्ति करती थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, बड़ी बहन और शिक्षकों को दिया।
सुनीता ने बताया कि उनका विद्यालय घर से लगभग पाँच किलोमीटर दूर है, जहां वे प्रतिदिन साइकिल से जाती थीं और कई बार पैदल भी जाना पड़ता था। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ घर एवं खेती के कार्यों में भी सहयोग किया। दोनों बहनों की इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।



