
*कांग्रेस भाजपा की अवसरवादी राजनीति के विरुद्ध पर्दाफाश*

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*भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), छत्तीसगढ़ राज्य परिषद
कामरेड गीता मुखर्जी के अधूरे सपनों और महिला आरक्षण की सच्चाई पर कांग्रेस-भाजपा की अवसरवादी राजनीति के विरुद्ध पर्दाफाश*
कोंडागांव छत्तीसगढ़: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, छत्तीसगढ़ राज्य परिषद कामरेड गीता मुखर्जी के ऐतिहासिक संघर्ष को नमन करते हुए आज देश की सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों की दोहरी मानसिकता पर तीखा प्रहार करती है। कामरेड गीता मुखर्जी, जो महिला आरक्षण विधेयक (33% आरक्षण) की असली सूत्रधार और संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्ष थीं, ने जिस स्वप्न को संसद में 1996 में निजी सदस्य विधेयक के रूप में रखा था, उसे आज के तथाकथित विकासवादी दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का साधन बना लिया है
कांग्रेस और भाजपा की अवसरवादिता पर सवाल:
पिछले तीन दशकों से महिला आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक श्रेय लेने का अखाड़ा बन गया है कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों ने अपनी सुविधानुसार महिला अधिकारों का इस्तेमाल किया है। जहाँ कांग्रेस ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद इस विधेयक को निर्णायक अंजाम तक नहीं पहुँचाया, वहीं भाजपा ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम पर इसे राज्यसभा में पारित करवाकर चुनावी ढोंग रचा लेकिन, जब लोकसभा में इसे लागू करने और परिसीमन (डिलिमिटेशन) की बात आई, तो भाजपा ने इसे फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया। यह स्पष्ट है कि इन पूंजीवादी दलों के लिए महिला सशक्तिकरण केवल एक चुनावी नारा है, जबकि जमीनी स्तर पर वे महिलाओं को सत्ता में समान भागीदारी देने से डरते हैं सीपीआई की मांग:
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी छत्तीसगढ़ राज्य परिषद स्पष्ट रूप से मांग करती है कि:
अविलंब कार्यान्वयन: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बिना किसी बहाने (परिसीमन) के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
समावेशी आरक्षण: विधेयक में ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि यह विधेयक वास्तव में समावेशी और न्यायपूर्ण बन सके
श्रेय की राजनीति का अंत: कामरेड गीता मुखर्जी जैसे संघर्षशील नेताओं के बलिदान और उनकी मेहनत को ‘चुनावी श्रेय’ की राजनीति से अलग रखा जाए। यह विधेयक किसी एक दल की बपौती नहीं, बल्कि भारतीय महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है।
कामरेड गीता मुखर्जी ने वर्ग संघर्ष और जेंडर समानता के लिए जो मशाल जलाई थी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उस संघर्ष को तब तक जारी रखेगी जब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की 33% हिस्सेदारी एक कानूनी सच्चाई न बन जाए। हम प्रदेश और देश की महिलाओं से आह्वान करते हैं कि वे कांग्रेस और भाजपा के इस पाखंड को समझें और अपने हक के लिए एकजुट हों।
