*अमरकंटक में विश्व कल्याण हेतु शुरू हुआ भव्य श्री गायत्री महायज्ञ*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
बौराहा बाबा के सान्निध्य में निकली कलश यात्रा , 9 अक्टूबर को पूर्णाहुति एवं विशाल महाभंडारा
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र धार्मिक-आध्यात्मिक नगरी अमरकंटक में विश्व कल्याण , सुख-समृद्धि , पर्यावरण शुद्धि तथा मानवता के मंगल की भावना के साथ भव्य श्री गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ हो गया है । संत शिरोमणि श्री श्री 1008 बौराहा बाबा के सान्निध्य एवं पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से बौराहा बाबा आश्रम में आयोजित गायत्री महायज्ञ श्रद्धा , भक्ति और वैदिक परंपराओं का अनुपम संगम बन गया है ।
महायज्ञ के प्रथम दिवस 4 अक्टूबर को श्रद्धालुओं की सहभागिता से भव्य कलश यात्रा ढोल मजीरा , शंख कि मधुर ध्वनि बीच निकाली गई । वैदिक मंत्रोच्चार , शंखनाद एवं धार्मिक जयघोष के बीच कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया । इसके पश्चात विधि-विधान से अग्नि प्राकट्य एवं यज्ञ अनुष्ठान प्रारंभ हुए ।
आयोजन की जानकारी देते हुए अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय एवं शक्ति महाराज ने बताया कि 4 से 9 अक्टूबर तक चलने वाले इस महायज्ञ में प्रतिदिन यज्ञ , हवन , पूजन , वैदिक अनुष्ठान , प्रवचन तथा विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं । गायत्री महायज्ञ का समापन 9 अक्टूबर को पूर्णाहुति एवं विशाल महाभंडारे के साथ संपन्न होगा , जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है ।
स्वामी बौराहा बाबा ने बताया कि गायत्री महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का जागरण , नैतिक मूल्यों का संवर्धन , पर्यावरण संरक्षण तथा विश्व शांति का संदेश प्रसारित करना है । उन्होंने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है , जो जनकल्याण और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम है ।
शिव गंगा सावित्री जन कल्याण संस्थानम् बनारस (काशी) के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में काशी से पधारे विद्वान ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ , हवन , पूजन एवं वैदिक कर्मकांड संपन्न कराए जा रहे हैं । यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु विशेष व्यवस्थाएं भी की गई हैं ।
आयोजकों ने क्षेत्र के धर्मप्रेमी नागरिकों एवं श्रद्धालुओं से परिवार सहित उपस्थित होकर यज्ञ में सहभागिता करने तथा धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की है । महायज्ञ के चलते आश्रम परिसर में प्रतिदिन भक्तों की बड़ी संख्या पहुंच रही है और पूरा वातावरण भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत बना हुआ है ।

