*स्पष्ट जानकारी मांगने के बाद आर टीआई खारिज किया गया जानबूझकर*


कोटा ग्लोबल न्यूज ब्यूरो की रिपोर्ट
जनपद पंचायत कोटा का मामला
*जनपद पंचायत कोटा में सूचना के अधिकार की अनदेखी स्पष्ट सवाल को बताया अस्पष्ट, धारा 2(च) की आड़ में RTI खारिज*
*कोटा 05 अक्टूबर 2026*
जनपद पंचायत कोटा से सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को जन सूचना अधिकारी द्वारा धारा 2(च) का हवाला देकर निरस्त कर दिया गया, जबकि आवेदक द्वारा बेहद स्पष्ट और बिंदुवार जानकारी मांगी गई थी।
*आवेदन में क्या मांगा गया था? (ID 220260923011346)*
आवेदक ने जनपद पंचायत कोटा के अंतर्गत आने वाली समस्त 104 ग्राम पंचायतों में वर्ष 2022 से जुलाई 2026 तक –
1. शासन द्वारा कुल कितने कार्यों का आवंटन/स्वीकृति दी गई?
2. सभी पंचायतों को मिलाकर कुल कितनी राशि स्वीकृत हुई? (योजना-वार विवरण – मनरेगा, 15वां वित्त आयोग, स्वच्छ भारत मिशन, सांसद/विधायक निधि आदि)
3. जुलाई 2026 की स्थिति में कुल कितने कार्य अपूर्ण/अधूरे हैं? (पंचायत-वार सूची)
4. अपूर्ण रहने का कारण क्या है?
5. पूर्ण हुए कार्यों में कितनी राशि का भुगतान हुआ और कितनी शेष है?
यह पूरी तरह से रिकॉर्ड पर उपलब्ध सूचना है।
PIO का जवाब
उक्त चाही गई जानकारी अस्पष्ट होने के कारण धारा 2(च) के तहत् परिभाषा में नहीं होने से उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं है, एतद् द्वारा आवेदन निरस्त योग्य है।
सवाल खड़े हो रहे हैं
जबकि आवेदक ने वर्ष, योजना, पंचायतों की संख्या तक स्पष्ट लिखी है, फिर इसे अस्पष्ट कैसे कहा जा सकता है?
धारा 2(च) में ‘सूचना’ का अर्थ दस्तावेज, रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग से है। कार्यों की स्वीकृति और राशि का विवरण तो सीधे इसी परिभाषा में आता है।
क्या 104 पंचायतों के 4 साल के कामों का हिसाब देने से बचने के लिए जानबूझकर यह निरस्तीकरण किया गया?
नियमानुसार PIO को यदि आवेदन बड़ा है तो धारा 7(9) के तहत नियत शुल्क लेकर जानकारी देनी चाहिए थी, न कि गोल-मोल जवाब देकर खारिज करना।
स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि जनपद स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता न हो, इसलिए RTI देखने वाले बाबू द्वारा ऐसे तकनीकी बहाने बनाए जा रहे हैं। इसकी प्रथम अपील और उच्च अधिकारियों से शिकायत की तैयारी की जा रही है। ऐसे अनभिज्ञबाबू को वहां पर बैठाया गया है उनको कुछ जानकारी नहीं है
