*तखतपुर-बरेला में NH-130A के नाम पर भ्रष्टाचार का नाला ! 53 करोड़ के प्रोजेक्ट में*

बिलासपुर मुंगेली ग्लोबल न्यूज ब्यूरो की रिपोर्ट
तखतपुर-बरेला में NH-130A के नाम पर भ्रष्टाचार का नाला ! 53 करोड़ के प्रोजेक्ट में छड़ की खुलेआम चोरी
*तखतपुर (बिलासपुर) लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर द्वारा तखतपुर शहरी क्षेत्र में बनाई जा रही आरसीसी नाली की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आपके द्वारा भेजी गई 4 तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि किस तरह एस्टीमेट को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है।
कार्य का नाम NH-130A तखतपुर शहरी भाग लंबाई 15.275 किमी में वन टाइम इम्प्रूवमेंट कार्य
-जॉब क्रमांक NH-130A-CG-2025-26-19
-प्रशासकीय स्वीकृति 65.91 करोड़ (31.10.2025 भारत सरकार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय)
-अनुबंधक का नाम मैसर्स कन्हैयालाल अग्रवाल, कवर्धा जिला कबीरधाम
-अनुबंधित लागत 53.219 करोड़
– कार्य पूर्णता अवधि 12 माह (22.02.2027 तक)
-स्थल प्रभारी सुनील कुमार श्रीवास्तव
-कार्यपालन अभियंता आर.के. खाबरा, अनुविभागीय अधिकारी ए.आर. पेंगवार, उपअभियंता नरेन्द्र खाण्डे
फोटो में क्या दिख रहा है – जो आरोपों की पुष्टि करता है
1. छड़ की दूरी में भारी अंतर पहली और तीसरी फोटो में RCC नाली की साइड वॉल में खड़ी छड़ें (vertical bars) लगभग 1 से 1.5 फीट की दूरी पर लगाई गई हैं, जबकि एस्टीमेट के अनुसार यह 4 से 6 इंच पर होनी चाहिए। हॉरिजॉन्टल छड़ें भी गिनती की हैं।
2. स्लैब में जंग लगी छड़ दूसरी फोटो में नाली के ऊपर के स्लैब की जाली में भी 8mm की जंग लगी हुई पतली छड़ का इस्तेमाल हो रहा है और गैप 12 इंच से ज्यादा है। सेंट्रिंग में ईंट और पत्थर लगाकर सपोर्ट दिया गया है जो तकनीकी रूप से गलत है।
3. बिना बेस के काम फोटो में मजदूर पानी भरे गड्ढे में खड़ा होकर जाली बांध रहा है, नीचे PCC या कोई सफाई नहीं है, सीधे मिट्टी में कंक्रीट डाली जा रही है। यह भविष्य में नाली के धंसने का कारण बनेगा।
जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्य स्थल पर कभी भी टाइमकीपर, उपअभियंता या ठेकेदार का मुंशी मौजूद नहीं रहता। काम पूरी तरह से दिहाड़ी मजदूरों के भरोसे है। जब अधिकारियों को फोन लगाया जाता है तो फोन रिसीव नहीं होता।
मांग ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और NHAI के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर छड़ की नापजोख, सीमेंट की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और जब तक जांच पूरी न हो काम रोक दिया जाए।
ये नाली अगर इसी गुणवत्ता से बनी तो एक बारिश भी नहीं झेल पाएगी और 53 करोड़ का सरकारी पैसा पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।
1. पानी में खड़े होकर जाली बांधना
2. ईंट-पत्थर से सपोर्ट और जंग लगी छड़
3. बिना ढलाई के अधूरा निर्माण
4. PWD का सूचना बोर्ड – 53.219 करोड़ का प्रोजेक्ट है। वाले अधिकारी तेरा खेल जब कोई उक्त रोड में नेता अधिकारी आना-जाना लगा रहता है उसके बाद भी इस और ध्यान नहीं दिया गया




