*ब्रेकिंग न्यूज़ कोटा ज.पं .के ग्राम पं. तुलुफ में रेल लाइन पार मोहली में गुणवत्ता फेल आमागोहन में अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन*

खोगसरा /आमागोहन ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट
कोटा विकासखंड क्षेत्र के तुलुफ में महिला बाल विकास विभाग का खेल – CM हेल्पलाइन ने लगाई रोक फिर भी चलता रहा निर्माण घटिया ईंटों से बन रहे बच्चों के भविष्य
कोटा विकासखंड में आंगनबाड़ी भवन निर्माण पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग ग्रामीण ने की
बिलासपुर/कोटा- महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत बन रहे आंगनबाड़ी भवनों में भारी अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। कोटा विकासखंड के तुलुफ, मोहली और आमागोहन पंचायतों में निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। आरोप है कि कहीं बस्ती से दूर रेल लाइन के पार भवन बनाया जा रहा है तो कहीं 14 लाख की राशि मिलने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है।
*तुलुफ में सबसे बड़ा खेल – बस्ती में जमीन होते हुए भी रेल लाइन पार निर्माण*
ग्राम पंचायत तुलुफ का मामला सबसे गंभीर है। ग्रामीणों के अनुसार जिस बस्ती के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत है, उसी बस्ती में शासकीय भूमि उपलब्ध होने के बावजूद भवन को बस्ती से बाहर, मुख्य सड़क और रेलवे लाइन के पार बनाया जा रहा है।
छोटे-छोटे बच्चों को इस भवन तक पहुंचने के लिए रोज रेलवे ट्रैक और नेशनल हाईवे जैसा व्यस्त मार्ग पार करना पड़ेगा। इससे हादसे का खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब बस्ती के अंदर ही जमीन है तो भवन को जानबूझकर इतनी दूर क्यों बनाया जा रहा है?
सिर्फ स्थान ही नहीं, निर्माण सामग्री को लेकर भी सवाल है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भवन में लगी ईंटें हाथ से दबाते ही टूट रही हैं। गुणवत्ताहीन सामग्री से बन रहे इस भवन की मजबूती पर ही सवाल है।
*CM हेल्पलाइन में शिकायत रोक के बाद भी नहीं रुका काम*
ग्रामीणों ने इसकी शिकायत CM हेल्पलाइन 181 पर की थी। जांच के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने निर्माण कार्य रोकने का आदेश भी जारी किया था। लेकिन आरोप है कि कुछ दिन बाद ही बिना किसी सार्वजनिक जानकारी के फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति कर पंचनामा बना दिया गया और शिकायत को बंद कर दिया गया। सवाल यह है कि जब काम रोकने का आदेश था तो दोबारा किसके आदेश से काम शुरू हुआ? इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
*मोहली में जनमन योजना के भवन पर सवाल*
ग्राम पंचायत मोहली के बगबुड़ में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत विशेष रूप से बैगा आदिवासी परिवारों के लिए आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत हुआ था। अब चर्चा है कि इस भवन को बैगा बस्ती से हटाकर दूसरी बस्ती में बनाया जा रहा है।
यदि ऐसा होता है तो केंद्र सरकार की विशेष योजना का लाभ बैगा परिवारों को नहीं मिलेगा। ग्रामीणों ने पूछा है कि क्या ग्रामसभा और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना स्थल परिवर्तन किया जा सकता है?
इसी पंचायत के छपरापारा में बन रहे दूसरे आंगनबाड़ी भवन में भी घटिया निर्माण का आरोप है।
*आमागोहन में राशि जारी, फिर भी भवन अधूरा*
तीसरा मामला आमागोहन पंचायत का है। यहां आंगनबाड़ी भवन के लिए लगभग 14 लाख रुपये की राशि जारी हो चुकी है, लेकिन महीनों बाद भी भवन अधूरा पड़ा है। बच्चे आज भी जर्जर पुराने भवन में बैठने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तुलुफ और आमागोहन दोनों जगह एक ही ठेकेदार को काम दिया गया है, इसलिए इसकी भी जांच जरूरी है।
* RES .एस डी ओ. इंजीनियर और परियोजना अधिकारी की भूमिका पर सवाल*
ग्रामीणों ने सबसे बड़ा सवाल तकनीकी निगरानी पर उठाया है। आरोप है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के तकनीकी अधिकारी और परियोजना अधिकारी कभी मौके पर निरीक्षण करने नहीं आते। कार्यालय में बैठकर ही फाइलों पर हस्ताक्षर हो जाते हैं और घटिया निर्माण का भुगतान हो जाता है।
आंगनबाड़ी भवन केवल एक इमारत नहीं है। यहां 3 से 6 साल के मासूम बच्चे, गर्भवती महिलाएं और शिशुवती माताएं आती हैं। ऐसे में भवन का सुरक्षित होना सबसे जरूरी है।
*ग्रामीणों की 7 सूत्रीय मांग*
ग्रामीणों ने कलेक्टर बिलासपुर से मांग की है कि –
1. तुलुफ, मोहली और आमागोहन के सभी भवनों का जिला स्तरीय स्वतंत्र टीम से भौतिक सत्यापन हो।
2. निर्माण सामग्री के सैंपल लेकर लैब टेस्ट कराया जाए।
3. स्वीकृत स्थल और वर्तमान स्थल का मिलान किया जाए।
4. माप पुस्तिका, बिल और भुगतान की जांच हो।
5. रोक के आदेश के बाद काम कैसे शुरू हुआ, इसकी जांच हो।
6. जनमन योजना के भवन का स्थल परिवर्तन निरस्त किया जाए।
7. दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
अब देखना होगा कि जिला शासन प्रशासन इस मामले में स्वतंत्र जांच कराता है या फिर यह मामला भी विभागीय रिपोर्ट में ही उलझ कर रह जाएगा।




