*ज. पं . से ग्राम पंचायत तक भ्रष्टाचार कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच नेवसा में 5.42 लाख के गबन का खुलासा*

बिलासपुर /कोटा ग्लोबल न्यूज
नेवसा में विकास के नाम पर गबन 15 कामों की राशि गायब, जांच में खुली पोल, ग्रामीण बोले – काम हुआ ही नहीं, जनपद में रिपोर्ट ठंडे बस्ते में
ग्लोबल ब्रेकिंग न्यूज़ कोटा जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं है। जनपद से लेकर ग्राम पंचायत तक कमीशनखोरी और गबन की चर्चा आम है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच, जांच और प्रतिवेदन का खेल चलता है। जांच भी तब होती है जब ऊपर से कड़ा नोटिस आता है। उसके बाद टीम बनती है, खानापूर्ति कर रिपोर्ट जमा कर दी जाती है और मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला नेवसा ग्राम पंचायत से सामने आया है, जहां सचिव पर लाखों रुपये के गबन का आरोप जांच में सही पाया गया है।
साल भर पहले हुई थी शिकायत, जनपद ने नहीं सुनी
जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने लगभग एक साल पहले नेवसा के सचिव लव जायसवाल पर 15वें वित्त की राशि में गबन का आरोप लगाते हुए जनपद पंचायत कोटा में शिकायत की थी। जनपद ने कोई कार्रवाई नहीं की।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला पंचायत बिलासपुर में शिकायत की। जिला पंचायत ने जनपद को जांच कर प्रतिवेदन भेजने को कहा, लेकिन जनपद के अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगी।
आखिर में थक-हारकर शिकायतकर्ता ने सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा दी।
सीएम पोर्टल की फटकार के बाद जागा प्रशासन
सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद जिला पंचायत हरकत में आया और 24 जून 2026 को जनपद पंचायत कोटा को कड़े शब्दों में नोटिस जारी कर तत्काल जांच के आदेश दिए।
इस नोटिस के बाद जनपद पंचायत कोटा ने 7 अगस्त 2026 को दो सदस्यीय जांच टीम गठित की। इसमें वरिष्ठ लेखा अधिकारी जागेश्वर चतुर्वेदानी और इंजीनियर पटेरिया को शामिल किया गया।
जांच टीम ने 18 अगस्त 2026 को नेवसा पंचायत पहुंचकर रिकॉर्ड खंगाले और मौके का निरीक्षण किया तो बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया।
कागजों में 15 काम, मौके पर एक भी नहीं
जांच में पाया गया कि सचिव लव जायसवाल ने वर्ष 2024-25 में 15वें वित्त की राशि से 15 ऐसे कामों के नाम पर 5 लाख 42 हजार 674 रुपये* निकाल लिए हैं, जो गांव में हुए ही नहीं हैं।
इनमें प्राथमिक शाला में शौचालय मरम्मत, प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी भवनों की रंगाई-पुताई, सीसी रोड मरम्मत, स्ट्रीट लाइट मरम्मत और बोर मरम्मत जैसे काम शामिल हैं। गांव वालों ने भी जांच टीम को बताया कि इस तरह का कोई काम पंचायत में नहीं हुआ है।
जांच अधिकारी जागेश्वर चतुर्वेदानी ने बताया कि सचिव को स्पष्टीकरण जारी किया गया है और जो भी मौके पर पाया गया, उसका प्रतिवेदन जनपद में जमा कर दिया गया है।
सीईओ ने नहीं उठाया फोन
इस संबंध में जनपद पंचायत कोटा के सीईओ युवराज सिन्हा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
अब सवाल यह है कि जांच में गबन साबित होने के बाद भी क्या सचिव पर एफआईआर और वसूली की कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह प्रतिवेदन की फाइलों में दबकर रह जाएगा




