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*अमरकंटक में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया हरछठ पर्व*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज/श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट



संतान की लंबी उम्र , सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना हेतु माताओं ने रखा व्रत

अमरकंटक / मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाने वाला हरछठ (हल षष्ठी) पर्व बुधवार को श्रद्धा , आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया । संतान की दीर्घायु , उत्तम स्वास्थ्य , सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना को लेकर माताओं ने दिनभर व्रत रखकर हरछठ माता की पूजा-अर्चना की ।
नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रातःकाल से ही पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थीं । महिलाओं ने पूजन के दौरान पारंपरिक गीतों और मंगलगान से वातावरण भक्तिमय बना रहा ।

हरछठ पर्व भगवान बलराम से जुड़ा माना जाता है । बलराम जी के प्रमुख शस्त्र हल और मूसल होने के कारण इस दिन कृषि एवं हल से संबंधित प्रतीकों का विशेष महत्व रहता है । महिलाओं ने पूजा में  पारंपरिक सामग्री अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती है ।

पंडित मुकेश पाठक ने बताया व्रत की परंपरा के अनुसार इस दिन हल से जोते गए खेतों में उत्पन्न अन्न का सेवन नहीं किया जाता । महिलाओं ने परंपरागत नियमों का पालन करते हुए विशेष प्रसाद एवं व्रताहार ग्रहण करती है  । पूजा के उपरांत हरछठ माता की कथा का श्रवण किया जाता है तथा संतान के मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना की जाती है ।

पर्व के अवसर पर स्थानीय बाजारों में भी विशेष रौनक देखने को मिली । पूजन सामग्री , फल-फूल एवं पारंपरिक वस्तुओं की खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ बाजार में उमड़ी रही । धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा यह पर्व क्षेत्र की लोकसंस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को सहेजने का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है ।

हरछठ पर्व के आयोजन से अमरकंटक के अलावा आस पास क्षेत्रों में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा और माताओं ने अपनी संतानों के सुखद , स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की कामना के साथ व्रत का समापन किया गया ।

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