*भोजली विसर्जन पर लगा मेला, जर्जर सड़क और कीचड़ से जूझती रहीं महिलाएं बच्चे*

कोटा ग्लोबल न्यूज नारायण यादव की रिपोर्ट




कोटसागर तालाब में भोजली विसर्जन, देवी गंगा-लहर तुरंगा’ गीतों से गूंजा घाट
करगीरोड छत्तीसगढ़ के लोकपर्व भोजली तिहार के अवसर पर शुक्रवार शाम कोटा नगर में भक्तिमय माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों और बच्चों ने सिर पर भोजली टोकरी रखकर पारंपरिक गीत गाते हुए कोट सागर तालाब में विसर्जन किया।
डाक-बंगला वार्ड नं. 10 से नगर की गलियों से होते हुए महिलाएं देवी गंगा, देवी गंगा लहर तुरंगा जैसे पारंपरिक सेवा गीत गाते हुए टोली के रूप में निकलीं। पीले और हरे रंग की लहलहाती भोजली को सिर पर रखकर महिलाएं नाचते-गाते तालाब के घाट पर पहुंचीं।
कोट सागर तालाब के घाट पर स्थित छोटे शिव मंदिर के पास भोजली की टोकरियां रखकर महिलाओं ने पूजा-अर्चना की। नारियल, सिंदूर, फूल चढ़ाकर सामूहिक आरती की गई और फिर तालाब में भोजली का विसर्जन किया गया। इस दौरान भोजली दाई की जय के जयघोष से पूरा घाट गूंज उठा।
विसर्जन के बाद परंपरा अनुसार लोगों ने एक-दूसरे के कान में भोजली खोंसकर ‘भोजली गियां, मितान कहकर अटूट मित्रता का वचन दिया। बुजुर्गों ने बच्चों को भोजली देकर आशीर्वाद दिया।
मेले में सुरक्षा व्यवस्था नदारद
कोटसागर तालाब के पास प्रतिवर्ष भोजली विसर्जन के दिन एक दिवसीय मेले का आयोजन होता है। मेले में बच्चों के खिलौने, मीना बाजार और क्षेत्रीय व्यापारियों की दुकानें लगीं। मेले में महिलाओं, बच्चों और पुरुषों की भारी भीड़ रही, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नहीं दिखी।
जर्जर सड़क से परेशानी
कोटा-रतनपुर मार्ग पर रेलवे स्टेशन फाटक से अंडरब्रिज तक बनी सीसी रोड बारिश के पानी से पूरी तरह जर्जर हो गई है। गड्ढों और कीचड़ के बीच से ही महिलाओं और युवतियों को पैदल चलकर विसर्जन के लिए जाना पड़ा, जिससे काफी परेशानी हुई। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं की गई है।
ग्रामीण मान्यता के अनुसार इस साल भोजली की बढ़वार अच्छी होने से धान की फसल भी अच्छी होने की उम्मीद है। नागपंचमी से बोई गई भोजली की 7 दिनों तक सेवा के बाद रक्षाबंधन के अगले दिन इसका विसर्जन किया जाता है












