*अमरकंटक में औषधीय खेती को मिलेगा नया आयाम *

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
नर्मदे हर सेवा न्यास की पहल से मिलेगी आर्थिक मजबूती
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में पर्यावरण संरक्षण , आयुर्वेदिक परंपरा के संवर्धन तथा ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में श्री नर्मदे हर सेवा न्यास द्वारा एक सराहनीय पहल की जा रही है । न्यास के अध्यक्ष श्री रामलाल रौतेल के मार्गदर्शन में औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार की जा रही है , जो भविष्य में स्थानीय किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है ।
श्री नर्मदे हर सेवा न्यास द्वारा विकसित की जा रही इस नर्सरी में आंवला , हर्रा , बेल , अश्वगंधा , सिंदूर , तुलसी , मुनगा तथा अर्जुन पौधे जैसे बहुमूल्य औषधीय एवं उपयोगी पौधों के बीजों का रोपण कर पौध तैयार किए जा रहे हैं । आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में इन पौधों का विशेष महत्व माना जाता है । साथ ही ये पौधे पर्यावरण संरक्षण , जैव विविधता संवर्धन और मानव स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी हैं ।
न्यास के पदाधिकारियों के अनुसार अमरकंटक क्षेत्र प्राकृतिक रूप से औषधीय वनस्पतियों की दृष्टि से समृद्ध है । यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से औषधीय खेती को अपनाएं तो कम लागत में बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर सकते हैं । इसी उद्देश्य से न्यास द्वारा चरणबद्ध रूप से पौध वितरण , तकनीकी मार्गदर्शन एवं जनजागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं ।
न्यास अध्यक्ष श्री रामलाल रौतेल ने कहा कि नर्मदा की पावन भूमि पर औषधीय पौधों का संरक्षण और संवर्धन केवल कृषि से जुड़ा विषय नहीं है बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक , आध्यात्मिक और पारंपरिक विरासत के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है । उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपने खेतों , घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक औषधीय पौधे लगाने की अपील करते हुए स्वस्थ समाज और हरित पर्यावरण निर्माण में सहभागिता का आह्वान किया ।
स्थानीय नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे अमरकंटक क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी कदम बताया है । उनका मानना है कि ऐसी योजनाएं न केवल औषधीय खेती को नई पहचान देंगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी ।
पर्यावरण संरक्षण , आयुर्वेदिक परंपरा के पुनर्जीवन और ग्रामीण विकास की त्रिवेणी बन चुकी यह पहल अमरकंटक को हरित , स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है ।

