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*कोटा ब्लॉक का सबसे बड़ा राशन घोटाला*

कोटा ग्लोबल न्यूज नारायण यादव की रिपोर्ट

*राशन दुकान में बड़ा खेल! 1700 हितग्राहियों में 700-800 को राशन नहीं मिलने का आरोप*

*फिंगरप्रिंट लेने के बाद भी राशन नहीं दिया, जांच में विक्रेता ने मानी अनियमितता की बात; 300 क्विंटल गड़बड़ी के आरोप की भी होगी जांच*
कोटा जनपद क्षेत्र के नवागांव (सलका) स्थित सहकारी विपणन संस्था के उपकेंद्र की राशन दुकान में राशन वितरण को लेकर गंभीर शिकायत सामने आने के बाद खाद्य विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों के आक्रोश के बीच फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान मौके पर पहुंचे और दुकान के रिकॉर्ड, स्टॉक एवं हितग्राहियों से संबंधित जानकारी की जांच की।
मामले में पहले करीब 300 क्विंटल राशन की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की गई थी। हालांकि जांच पूरी होने से पहले खाद्य विभाग ने इतनी मात्रा में गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है। लेकिन 170 क्विंटल के आसपास गबन का आंकड़ा सांमने आया है।  अब पूरे रिकॉर्ड के मिलान के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

1700 हितग्राही, 700-800 कार्डधारकों को राशन नहीं मिलने का आरोप
इस राशन दुकान से करीब 1700 हितग्राही जुड़े बताए जा रहे हैं। *ग्रामीणों का आरोप है कि अप्रैल, मई, जून और जुलाई के राशन वितरण में लगभग 700 से 800 राशन कार्डधारकों को परेशानी हुई और कई पात्र हितग्राहियों को उनका राशन नहीं मिला।*

सबसे गंभीर मामला 20-22 हितग्राहियों का सामने आया है, जिनसे राशन वितरण के दौरान फिंगरप्रिंट लेने के बाद भी राशन नहीं दिया गया। जांच के दौरान विक्रेता द्वारा भी ऐसी अनियमितता होने की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

*रिकॉर्ड में राशन, हितग्राहियों को नहीं मिला खाद्यान्न?*
ग्रामीणों का कहना है कि कई हितग्राहियों के रिकॉर्ड में राशन वितरण दर्ज है, लेकिन उन्हें वास्तविक रूप से राशन नहीं मिला। इसलिए अब ई-पॉस मशीन, फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और राशन कार्ड का मिलान कराया जाना जरूरी है।
फूड इंस्पेक्टर ने शिकायतकर्ताओं से ऐसे हितग्राहियों की सूची और राशन कार्ड सहित दस्तावेज 2-3 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है।

*राशन की चोरी की बात ने बढ़ाए सवाल*
जांच के दौरान राशन विक्रेता की ओर से सोसायटी में राशन चोरी होने की बात भी सामने आने की जानकारी है। यदि राशन चोरी हुई थी तो ग्रामीणों का सवाल है कि इसकी FIR क्यों नहीं हुई?

जब इस संबंध में फूड इंस्पेक्टर से सवाल किया गया तो उनके द्वारा कहा गया कि एफआईआर होने पर भी राशन की भरपाई विक्रेता को ही करनी होती है। इस पर शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि यदि विभाग को चोरी की जानकारी थी तो इसकी विधिवत जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
चोरी की घटना, उसकी मात्रा और FIR के संबंध में स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

*दुकान निलंबित करने का प्रस्ताव*
फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान ने कहा कि जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित राशन दुकान को निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। यदि खाद्यान्न की कमी या गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित संचालक संस्था से भरपाई कराकर हितग्राहियों को उनका राशन उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

*फूड इंस्पेक्टर आशीष दीवान ने कहा कि “लंबे समय से यह समस्या थी, लेकिन दो दिन पहले ही मुझे अवगत कराया गया। जांच की गई है। दोषियों पर कार्रवाई की गई है। हितग्राहियों को उनका राशन जल्द प्रदान किया जाएगा।”*

ग्रामीणों ने खाद्य निरीक्षक और विक्रेता को घेरा
जांच के दौरान ग्रामीणों में भारी आक्रोश दिखाई दिया। ग्रामीणों ने खाद्य विभाग के अधिकारी और राशन विक्रेता के सामने अपनी समस्याएं रखीं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कई महीनों से राशन वितरण में समस्या थी तो विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण क्यों नहीं किया गया?

*300 क्विंटल का आरोप, जांच के बाद बढ़ सकता है आंकड़ा*
मामले में करीब 300 क्विंटल राशन की गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है, लेकिन अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 1700 से अधिक हितग्राहियों वाली दुकान में पिछले कई महीनों के आवंटन, उठाव, स्टॉक और वास्तविक वितरण का मिलान होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खाद्यान्न की वास्तविक कमी कितनी है।
जांच में यदि रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण में बड़ा अंतर सामने आता है तो कथित गड़बड़ी की मात्रा 300 क्विंटल से अधिक भी हो सकती है।

*एक ही विक्रेता से 1700 हितग्राहियों को राशन वितरण पर सवाल*
ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया है कि इतनी बड़ी संख्या में हितग्राहियों वाली राशन दुकान का संचालन एक ही विक्रेता के माध्यम से किया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए और पात्र स्व-सहायता समूहों को राशन दुकान संचालन का अवसर देने पर विचार किया जाए।

*फूड इंस्पेक्टर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल*
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से ग्रामीण राशन संबंधी समस्या से परेशान थे। यदि खाद्य विभाग को पहले से जानकारी थी तो समय रहते जांच क्यों नहीं की गई? राशन चोरी की बात सामने आने के बावजूद संबंधित प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई?
इन्हीं सवालों को लेकर शिकायतकर्ताओं ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है और जांच के दौरान वर्तमान फूड इंस्पेक्टर को मामले से अलग रखकर किसी वरिष्ठ अधिकारी/स्वतंत्र टीम से जांच कराने की मांग उठाई है।

*CM हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज*
मामले को लेकर CM हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में राशन वितरण की अनियमितता, हितग्राहियों को राशन नहीं मिलने, फिंगरप्रिंट लेने के बाद राशन नहीं देने, कथित राशन चोरी, विभागीय निरीक्षण में लापरवाही और खाद्य निरीक्षक की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की गई है।

अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 1700 हितग्राहियों के लिए आवंटित राशन में वास्तविक रूप से कितना राशन दुकान तक पहुंचा, कितना स्टॉक में रहा, कितना रिकॉर्ड में वितरित दिखाया गया और कितना राशन वास्तव में हितग्राहियों को मिला?

जांच रिपोर्ट ही बताएगी कि मामला महज वितरण संबंधी अनियमितता है या इसके पीछे बड़े पैमाने पर खाद्यान्न की गड़बड़ी हुई है।

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