*पत्रकारों की एकजुटता और सम्मान ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत तरुण*


ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मिडिया संघ छत्तीसगढ़
कोटा/बिलासपुर ग्लोबल न्यूज नारायण यादव की रिपोर्ट
लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता का सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है। बदलते समय में पत्रकारों के सामने अनेक चुनौतियाँ खड़ी हैं। ऐसे दौर में सबसे अधिक आवश्यकता पत्रकारों के बीच आपसी विश्वास, एकजुटता और पारस्परिक सहयोग की है। यह बात ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ, छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव, सर्वव्यापी अखबार के प्रधान संपादक तरुण कौशिक ने कही।
उन्होंने कहा कि पत्रकार किसी विचारधारा, व्यक्ति या समूह से ऊपर उठकर सबसे पहले समाज और जनहित के प्रति जवाबदेह होते हैं। उनका दायित्व सत्य को सामने लाना, आम नागरिकों की आवाज़ को शासन-प्रशासन तक पहुँचाना तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। इसलिए पत्रकारों के बीच आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना हमेशा सर्वोपरि रहनी चाहिए।
प्रदेश महासचिव तरुण कौशिक ने कहा कि वर्तमान समय में पत्रकारों को केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई तकनीक, डिजिटल मीडिया, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और नैतिक पत्रकारिता के मानकों को भी अपनाना होगा। समाज का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब पत्रकार निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान, सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण, स्वास्थ्य सुविधाएँ, प्रशिक्षण, युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन तथा कार्य के लिए अनुकूल वातावरण जैसे विषय आज गंभीर चिंतन की मांग करते हैं। इन मुद्दों पर सामूहिक प्रयास ही पत्रकारिता को और अधिक सशक्त बना सकते हैं।
उन्होंने सभी पत्रकारों से आह्वान किया कि व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर पत्रकारिता के मूल उद्देश्य—जनहित, सत्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा—को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। जब पत्रकार एक-दूसरे के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए साथ खड़े होंगे, तभी समाज में पत्रकारिता की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता और अधिक मजबूत होगी।
तरुण कौशिक ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति एक सामाजिक उत्तरदायित्व है। इसलिए आवश्यक है कि सभी पत्रकार आपसी सद्भाव, संवाद, सहयोग और सकारात्मक सोच के साथ समाजहित में कार्य करें। यही भावना पत्रकारिता को नई ऊर्जा देगी और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को और अधिक मजबूत बनाएगी।