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*आदिवासी संस्कृति,साहित्य भाषा चिकित्सा पद्धति एवं विश्व बंधुत्व के संदेश के प्रसार का अभियान*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट

ऐतिहासिक पहल : मेघदूत मेघमार्ग पर निकली अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा-2026 पहुंची अमरकंटक ,

आदिवासी संस्कृति,साहित्य,भाषा,चिकित्सा पद्धति एवं विश्व बंधुत्व के संदेश के प्रसार का अभियान

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में मंगलवार को मेघदूत मेघमार्ग पर संचालित अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संस्कृति यात्रा-2026 का आगमन हुआ । यात्रा के प्रमुख आयोजक डॉ. राम विजय शर्मा (रायपुर) जो एक इतिहासकार , पुरातत्ववेत्ता एवं अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ता हैं , ने बताया कि यह यात्रा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुगाडाइ से प्रारंभ हुई है और आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है ।
उन्होंने बताया कि यात्रा मूगाडाई से रतनपुर , अमरकंटक सहित आगे विदिशा , उज्जैन , देवगढ़ , मंदसौर , कुरुक्षेत्र , हरिद्वार तथा काठमांडू (नेपाल) होते हुए मानसरोवर (तिब्बत) तक पहुंचेगी । इस ऐतिहासिक यात्रा का उद्देश्य आदिवासी संस्कृति , परंपराओं , भाषा , साहित्य , इतिहास तथा विश्व बंधुत्व के संदेश का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है ।

डॉ. राम विजय शर्मा ने कहा कि आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो द्वारा रचित साहित्य ‘मेघदूत’ का विभिन्न भाषाओं में अध्ययन एवं वाचन किया जाएगा । साथ ही आदिवासी समाज के बीच साहित्यिक संवाद आयोजित कर उनके इतिहास , संस्कृति , पारंपरिक चिकित्सा पद्धति तथा ज्ञान परंपरा पर व्यापक चर्चा की जाएगी । इससे आदिवासी समाज में जागरूकता बढ़ेगी तथा उनकी सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायता मिलेगी ।

अमरकंटक प्रवास के दौरान यात्रा दल ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय का भ्रमण कर शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों से विचार-विमर्श किया । साथ ही बैगा समाज एवं स्थानीय आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों से मिलकर उनकी परंपराओं , सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा की ।

यात्रा में तेलंगाना के वरंगल से शामिल साहित्यकार डॉ. वरिगोण्ड कांताराव ने भी सहभागिता की । साहित्य विषय में पीएचडी उपाधि प्राप्त डॉ. कांताराव को तेलुगु विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया जा चुका है । उन्होंने कहा कि यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को आदिवासी महाकवि कालिदास पंडो के साहित्य , विचारों और सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना है । यात्रा के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों , सामाजिक कार्यकर्ताओं , शिक्षाविदों तथा आमजन से संवाद स्थापित कर साहित्य , संस्कृति और सामाजिक समरसता पर चर्चा की जा रही है ।

यात्रा दल के साथ मुगाडाइ क्षेत्र से शिवचरण पंडो , धीरन पंडो , खेलसाय एवं मानकुंवर देवी सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधि भी शामिल रहे । यात्रा मार्ग में उन्होंने विभिन्न औषधीय वनस्पतियों , पारंपरिक आदिवासी ज्ञान एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कर यात्रा को ज्ञानवर्धक और उद्देश्यपूर्ण बनाया । उनके द्वारा दी गई जानकारियां आदिवासी समाज की समृद्ध ज्ञान परंपरा और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध को रेखांकित करती हैं ।

आयोजकों के अनुसार यह अभियान आदिवासी संस्कृति के संरक्षण , संवर्धन एवं वैश्विक स्तर पर उसके प्रचार-प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल है जो आने वाले समय में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊर्जा और व्यापक मंच प्रदान करेगा ।

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