अमरकंटक ग्लोबल न्यूजसंपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*अमरकंटक में 30 साल बाद वनों पर फिर साल बोरर का संकट 9535 पेड़ प्रभावित*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में  साल के वनों पर लगभग तीन दशक बाद एक बार फिर साल बोरर (हार्टवुड बोरर) का प्रकोप बढ़ने लगा है ।

अमरकंटक वन परिक्षेत्र में वर्ष 2026-27 के सर्वे में साल के वृक्षों में कीट का संक्रमण सामने आया है । वन विभाग के अनुसार 8,584 हेक्टेयर वन क्षेत्र के 18 कक्षों में लगभग 40 लाख साल के वृक्ष हैं  जिनमें तकरीबन  9535 वृक्ष साल बोरर से प्रभावित पाए गए हैं जिसमें अभी तक 15000 से अधिक संख्या में कीट पकड़े जा चुके है ।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अमरकंटक क्षेत्र में इससे पहले वर्ष 1995-96 के दौरान साल बोरर का बड़ा प्रकोप सामने आया था । शुरुआती स्तर पर संक्रमण पर नियंत्रण नहीं होने के कारण उस समय बड़ी संख्या में साल के वृक्ष संक्रमित हुए थे और प्रभावित पेड़ों को काटकर जंगल से हटाना पड़ा था । वर्तमान में संक्रमण स्थानीय स्तर पर है और विभाग इसे नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है ।

*तने के भीतर से करता है हमला*

साल बोरर की इल्ली पेड़ की छाल को भेदकर तने के भीतर प्रवेश करती है और सैपवुड व हार्टवुड को नुकसान पहुंचाते हुए सुरंगें बनाती है । इससे पेड़ धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगता है । मानसून के दौरान वयस्क कीट बाहर निकलकर अन्य स्वस्थ वृक्षों को संक्रमित करते हैं जिससे इस मौसम में संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है ।

*ट्रैप ट्री ऑपरेशन से किया जा रहा नियंत्रण*

वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष “ट्रैप ट्री ऑपरेशन” शुरू किया है । इसके तहत रस छोड़ रहे संक्रमित वृक्षों को छह से सात टुकड़ों में काटकर जंगल में ही रखा जाता है । इनसे निकलने वाली गंध से आकर्षित होकर साल बोरर कीट बड़ी संख्या में उन पर एकत्र हो जाते हैं । इसके बाद शाम से सुबह तक वनकर्मी और स्थानीय ग्रामीण इन कीटों को एकत्र कर संग्रहण केंद्र में जमा करते हैं । निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनका नष्टीकरण किया जाता है ।

*ग्रामीणों को मिलेगा प्रोत्साहन*

वन विभाग ने अभियान में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित की है । विभाग के अनुसार इस वर्ष प्रत्येक पकड़े गए साल बोरर कीट पर दो रुपये का प्रोत्साहन निर्धारित किया गया है । संग्रहित कीटों का सत्यापन करने के बाद राशि सीधे संबंधित ग्रामीण के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है । अब तक लगभग नौ हजार कीट नष्ट किए जा चुके हैं ।

*देहरादून से आएगा वैज्ञानिक दल*

साल बोरर के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों का दल अमरकंटक पहुंचकर प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन करेगा । विशेषज्ञ कीट के व्यवहार , संक्रमण के कारणों तथा प्रभावी नियंत्रण के उपायों पर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे जिससे भविष्य में इसके स्थायी प्रबंधन की रणनीति तैयार की जा सके ।

*साल बोरर का जीवनचक्र*

वन विशेषज्ञों के अनुसार साल बोरर का जीवनचक्र लगभग एक वर्ष का होता है और यह मानसून से जुड़ा रहता है । जून में बारिश शुरू होते ही वयस्क कीट संक्रमित पेड़ों से बाहर निकलते हैं । मादा कीट छाल की दरारों में सामान्यत: 100 से 300 अंडे देती है जिनसे तीन से सात दिन में लार्वा निकलते हैं । लार्वा कई महीनों तक तने के भीतर लकड़ी को नुकसान पहुंचाते हैं । दिसंबर से अप्रैल के बीच वे प्यूपा अवस्था में रहते हैं और अगले मानसून में वयस्क बनकर बाहर निकलते हैं जिससे संक्रमण का नया चक्र शुरू हो जाता है ।

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