*कुपुत्र के कुकृत्यों से लहूलुहान हुआ बुजुर्ग*

*कुपुत्र के कुकृत्यों से लहूलुहान हुआ बुजुर्ग पिता का कलेजा हमारे लिए मर चुका है सुनील, फिर भी क्यों बनाया जा रहा हमें निशाना*
नारायणपुर मिर्जापुर ग्लोबल न्यूज//प्रयागराज से राम आसरे की रिपोर्ट जमालपुर मुचलके बरईपुर, नरायनपुर, मिर्जापुर
राधेश्याम (पुत्र स्वर्गीय शंभू नाथ) ने सामाजिक एवं मानसिक उत्पीड़न से सुरक्षा तथा कानूनी रूप से बेदखल पुत्र पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि
“हमने जिसे अपनी उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वही बुढ़ापे में हमारी लाठी तोड़ने पर आमादा हो गया। जब उसकी गुंडागर्दी, शराबखोरी और अपशब्दों की सीमा पार हो गई, तो हमने भारी मन से उसे बेदखल कर दिया। अब वह हमारे लिए मर चुका है और हम उसके लिए! इसके बावजूद समाज के कुछ असामाजिक तत्व उसके कृत्यों का ठीकरा हमारे सिर फोड़कर हमें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।”
जनपद मिर्जापुर के थाना अदलहाट , पुलिस चौकी नरायनपुर क्षेत्र स्थित ग्राम जमालपुर मुचलके बरईपुर के मूल निवासी बुजुर्ग राधेश्याम पुत्र स्वर्गीय शंभू नाथ आज जीवन के उस संध्या काल में खड़े हैं जहाँ हर वृद्ध व्यक्ति शांति, सम्मान और अपनों के साथ की कामना करता है। परंतु, दुर्भाग्यवश वे अपने ज्येष्ठ पुत्र के दुराचार और आपराधिक प्रवृत्ति के कारण गहरे मानसिक आघात और सामाजिक बदनामी से जूझ रहे हैं।
राधेश्याम के दो पुत्र हैं:
छोटा पुत्र (विनोद कुमार): विनोद कुमार एक अत्यंत जिम्मेदार, शांत और आज्ञाकारी बेटा है। वह अपने वृद्ध माता-पिता के साथ घर पर रहकर पूरे परिवार की देखभाल करता है तथा खेती-बारी और घर के कामकाज को निष्ठापूर्वक संभालता है।
बड़ा पुत्र (सुनील कुमार): सुनील कुमार शुरुआत से ही गलत संगति, अनैतिक गतिविधियों और आवारागर्दी में लिप्त रहा है।
पीड़ित पिता राधेश्याम जी ने आंखों में आंसू लिए बताया कि बड़ा बेटा सुनील कुमार स्वभाव से हिंसक और अमर्यादित आचरण का व्यक्ति है। वह प्रतिदिन अत्यधिक शराब पीकर घर आता था और घर के माहौल को नरक बना देता था।
वह अपनी वृद्ध माता, पिता और बहनों के साथ अभद्र गाली-गलौज करता था और विरोध करने पर मारपीट पर उतारू हो जाता था।
सुनील ने परिवार की बिना मर्जी के टेडुआ गांव की एक लड़की (मौर्या) से विवाह कर लिया और परिवार से अलग रहने लगा।
उसकी निरंतर बढ़ती हिंसक हरकतों, प्रताड़ना और आपराधिक सोच को देखते हुए राधेश्याम ने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई से अर्जित चल-अचल संपत्ति से उसे कानूनी रूप से पूर्णतः बेदखल (निष्कासित) कर दिया। साथ ही, अपनी संपूर्ण जायदाद का वसीयतनामा अपने छोटे एवं कर्तव्यनिष्ठ पुत्र विनोद कुमार के नाम दर्ज करा दिया।
हाल ही में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि सुनील कुमार द्वारा किसी लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और आपराधिक वारदात को अंजाम देने का मामला सामने आया है। इस संदर्भ में पीड़ित राधेश्याम ने पूरी स्पष्टता के साथ अपना रुख साफ किया है।
उन्होंने बताया कि:
सुनील कुमार से उनका किसी भी प्रकार का सामाजिक, पारिवारिक, वित्तीय या कानूनी संबंध नहीं है।
बेदखली के बाद वह कहां रहता है और क्या करता है, इससे पीड़ित परिवार का कोई लेना-देना नहीं है।
“वह हमारे लिए मर चुका है और हम उसके लिए।” जब उससे सारे रिश्ते खत्म किए जा चुके हैं, तो उसके द्वारा किए गए किसी भी कुकृत्य के लिए बुजुर्ग माता-पिता को जिम्मेदार ठहराना सरासर अन्याय है।
इसके बावजूद, कुछ स्थानीय लोग और असामाजिक तत्व सुनील के कृत्यों की आड़ में बुजुर्ग पिता राधेश्याम का नाम घसीट रहे हैं, जिससे उन्हें सामाजिक रूप से जलील और मानसिक रूप से प्रताड़ित होना पड़ रहा है।
अपनी लाचारी और निरंतर हो रही बदनामी से त्रस्त होकर राधेश्याम ने प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री महोदय एवं मिर्जापुर पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
पीड़ित राधेश्याम ने कहा कि मामले व लफड़े से नाम पूरी तरह पृथक किया जाए सुनील कुमार द्वारा किए गए किसी भी अपराध या कानूनी विवाद से उसके पीड़ित पिता राधेश्याम और छोटे भाई विनोद कुमार को पूरी तरह मुक्त रखा जाए।
मानसिक प्रताड़ना देने वालों पर कार्रवाई हो जो लोग बिना वजह बुजुर्ग पिता को बदनाम कर रहे हैं या फंसाने की साजिश रच रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त हिदायत व दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
अपराधी बेटे पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो , कानून का उल्लंघन करने वाले सुनील कुमार के खिलाफ पुलिस निष्पक्ष जांच करे और उसे उसके किए की सख्त से सख्त सजा दे।
बेदखल किए गए कुपुत्र के हिंसक स्वभाव से पीड़ित वृद्ध माता-पिता और छोटे पुत्र को उचित सुरक्षा प्रदान की जाए।
यह मामला समाज और कानून के सामने एक यक्ष प्रश्न खड़ा करता है। जब एक पिता अपने कुपुत्र को उसकी गलत आदतों के कारण कानूनी तौर पर बेदखल कर चुका है और उससे संबंध विच्छेद की घोषणा कर चुका है, तो फिर उस कुपुत्र के अपराधों का बोझ एक बेबस, वृद्ध पिता के कंधों पर क्यों डाला जा रहा है?
राधेश्याम जी आज न्याय की आस में प्रशासन की ओर देख रहे हैं। उम्मीद की जाती है कि मिर्जापुर प्रशासन और माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले का संज्ञान लेकर पीड़ित बुजुर्ग को न्याय, सुरक्षा और शांतिपूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करेगा।


