*श्रीमद् भागवत कथा और श्री विष्णु महायज्ञ की गूंज*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
अमरकंटक के रामघाट पर श्रीमद् भागवत कथा और श्री विष्णु महायज्ञ की गूंज, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी तथा
प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल अमरकंटक में मां नर्मदा के पावन तट रामघाट पर इन दिनों अध्यात्म , भक्ति और संस्कृति का अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिल रहा है । परिक्रमा वासी संत पूरण दास जी महाराज ( दादू दयाल सम्प्रदाय) के पावन सानिध्य में भव्य श्री विष्णु महायज्ञ , सप्तशती निशा हवन , श्रीकृष्ण रास लीला और सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है , जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है ।
स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज की ओजस्वी वाणी से बरस रहा अमृत
जयपुर के सुप्रसिद्ध तपस्वी संत स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज अपनी संगीतमय शैली और ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान करा रहे हैं । व्यास पीठ से कथा प्रसंगों के माध्यम से वे धर्म , सदाचार , प्रेम , सेवा और मानव कल्याण का अनूठा संदेश दे रहे हैं ।
महाराजश्री ने प्रवचन के दौरान फरमाया कि भगवान सभी का कल्याण करते हैं और उनकी दृष्टि में सभी समान हैं । मनुष्य को सदैव भगवान का स्मरण करते हुए अपने जीवन में भक्ति , विश्वास और सद्भाव बनाए रखना चाहिए । सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करने वाले भक्तों पर ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है ।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, गूंजा ‘राम आएंगे’
कथा के दौरान जब स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज ने सुप्रसिद्ध भजन “राम आएंगे , राम आएंगे , मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे” का संगीतमय गायन किया तो पूरा कथा स्थल भक्तिरस में डूब गया । भजन की मधुर धुनों पर उपस्थित भक्तजन भावविभोर होकर झूमते और नृत्य करते नजर आए ।
महायज्ञ, निशा हवन और रास लीला से बढ़ा आध्यात्मिक उल्लास
परिक्रमा वासी संत पूरण दास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित हो रहे श्री विष्णु महायज्ञ और सप्तशती निशा हवन से अमरकंटक का वातावरण पूरी तरह पवित्र और ऊर्जावान हो गया है । इसके साथ ही सांध्यकालीन बेला में आयोजित हो रही श्रीकृष्ण रास लीला के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर मंचन किया जा रहा है , जिसे देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं ।
मां नर्मदा के पावन तट पर चल रहे इन धार्मिक अनुष्ठानों से श्रद्धालुओं , परिक्रमा वासियों और स्थानीय भक्तों में अपार उत्साह है । यह आयोजन सभी के लिए धर्म , भक्ति और आत्मचिंतन का एक अलौकिक अवसर बना हुआ है । यह आयोजन नवरात्रि के प्रथम दिवस कलश यात्रा , मां रेवा को छप्पन भोग लगाने के बाद श्री विष्णु महायज्ञ , सप्तशती निशा हवन , भागवत कथा और श्रीकृष्ण रास लीलाओं का वर्णन प्रारंभ हुआ ।

