*रामचरित स्मरण के साथ ही धर्म संस्कृति का प्रसार*

भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट
रामायण ज्ञान परीक्षा मे भरपूर उत्साह दिखा इस बार
बरसते पानी मे परीक्षा स्थल पंहुचे परिक्षार्थीगण
भाटापारा 24 अगस्त/कोई विधा जब लय का रुप ग्रहण कर लेती है तो उसमे तारतम्य का सुखद स्वर नजर आता है तथा परिस्थतियां उसे प्रभावित करती हुई दिखाई नहीं देती है क्योकि हर परिस्थिति मे उससे जुड़ी कड़ियां जीवंत स्वरुप मे प्रकट होती है,विगत सात वर्षों से निरंतर गोस्वामी तुलसीदास की जयंती के उपलक्ष्य मे सरयू साहित्य परिषद द्वारा आयोजित की जा रही रामायण ज्ञान परीक्षा मे इस वर्ष इसकी अभिव्यक्ति स्पष्ट रुप से होती हुई नजर आयी बरसते पानी मे पंहुचे परिक्षार्थी
स्थानीय नगर पालिका विद्यालय मे आयोजित हुई परीक्षा न ही किसी कैरियर की परीक्षा थी और न ही किसी विद्यालय एवं महाविद्यालय का इम्तहान था लेकिन उत्साह और कौतूहल विशेष परीक्षा की तरह ही नजर आ रही थी,लगभग एक महिने पूर्व से पंजीयन की प्रक्रिया जारी थी एवं परिक्षार्थीगण उत्साह के साथ पंजीयन मे भाग लेते हुए नजर आ रहे थे तथा पूछे जाने वाले प्रश्न को लेकर कौतुहल एवं जिज्ञासा के साथ तैयारी की बानगी भी नजर आ रही थी,और लगभग 130 पंजीकृत परीक्षार्थियों मे बड़ी संख्या मे परीक्षार्थी बरसते पानी के बीच परीक्षा स्थल पंहुचे उपरोक्त परिस्थिति रामायण ज्ञान परीक्षा आयोजन के प्रति जुड़ाव एवं उत्साह को स्पष्ट रुप से अभिव्यक्त कर गयी पूजन अर्चन के साथ शुभारंभ समस्त ब्राम्हण प्रकल्पों के संयुक्त संयोजन मे आयोजित रामायण ज्ञान परीक्षा अभियान का शुभारंभ माँ सरस्वती रामचरितमानस एवं गोस्वामी तुलसीदास जी के पूजन अर्चन से हुआ, परीक्षार्थियों का उत्साहवर्धन करने एवं शुभकामनाए प्रदान करने के लिए उपस्थित अतिथिगणों व्याख्यान दिवाकर आचार्य झम्मन शास्त्री नगर पालिका अध्यक्ष अश्वनी शर्मा एवं पूर्व कृषि उपज मंडी अध्यक्ष सुशील शर्मा द्वारा पं दीपक पाण्डेय के सानिध्य मे भगवान का पूजन अर्चन किया गया,इस अवसर पर आयोजन के मार्गदर्शक सत्यनारायण जोशी नरेश चौबे सरयू साहित्य परिषद के पदाधिकारी सदस्यगण ब्राम्हण प्रकल्पों के प्रमुख एवं बड़ी संख्या मे मातृशक्तियों सहित परिक्षार्थीगण उपस्थित रहे
अतिथी उदबोधन की कड़ी परिक्षार्थीगणों को शुभकामनाएं प्रदान करने पंहुचे अतिथिगणों द्वारा रामायण ज्ञान परीक्षा आयोजन की सराहना करते हुए उन्होने यही कहा कि रामायण केवल एक ग्रंथ नही है वरन हमारी संस्कृति संस्कार मर्यादा और जीवन मूल्यों का मार्गदर्शन करने वाली अमूल्य धरोहर है,इस प्रकार के आयोजन गौरवशाली परंपरा अध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों से जोड़ने का सुंदर माध्यम है,अतिथिगणों द्वारा परीक्षा आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना करते हुए परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं दी गयी



