
*कबीर जयंती पर डॉ. फूलदास महंत का आह्वान जाग सके तो जाग*

भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट
बिलासपुर/भाटापारा/रायपुर* संत कबीर की 629वीं जयंती पर नवीन शासकीय महाविद्यालय, सकरी के सहायक प्राध्यापक डॉ. फूलदास महंत ने “लोक जागरण के सजग प्रहरी संत कबीर” विषय पर विशेष आलेख लिखा है।
डॉ. महंत ने आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के हवाले से कहा कि कबीर “वाणी के डिक्टेटर” थे। उनके जैसा विचारक, समाजसुधारक और कवि हिंदी साहित्य के हजार वर्षों में नहीं हुआ। भक्तिकाल में कबीर, जायसी, सूर और तुलसी ने 1318 से 1643 के बीच समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाया और वीरगाथा काल की मार-काट से मुक्ति दिलाकर प्रेम, भाईचारे और एकता की स्थापना की।
उन्होंने कहा कि कबीर की साखी, शबद और रमैनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। 21वीं सदी में प्रतिस्पर्धा, कूटनीति, जातिवाद और स्वार्थ ने मानवता को चकनाचूर कर दिया है। धर्म के नाम पर आडंबर बढ़ रहा है, जबकि कबीर ने इन्हीं कुरीतियों का विरोध किया था।
डॉ. महंत ने कहा, “आज कबीर के नाम पर 252 पंथ चल रहे हैं, सबकी अपनी डफली और राग है। कबीर ने कहा था ‘तू कहता सब कागद लेखी, हों कहता निज आँखिन देखी’। हमें कबीर की वाणी को आत्मसात कर प्रेम रूपी ईश्वर को भीतर जागृत करना होगा।”
उन्होंने कबीर की पंक्तियों “तिल माही तेल है, चकमक में आग, तेरा साईं तुझ में है, जाग सके तो जाग”के माध्यम से युवाओं को आत्मचिंतन और कर्म का संदेश दिया।
निष्कर्ष डॉ. महंत का मानना है कि कबीर जयंती को तभी सार्थक बनाया जा सकता है जब हम उनकी वाणी को केवल गाकर नहीं, जीकर दिखाएं।

जाग सके तो जाग – डॉ फूलदास महंत
सहायक प्राध्यापक हिंदी
नवीन शासकीय महाविद्यालय सकरी जिला बिलासपुर छत्तीसगढ़
(लोक जागरण के सजग प्रहरी संत कबीर 629वीं जयंती पर विशेष आलेख)