
*किसानों को सरकारी दर से ज्यादा रेट में बिक रही खाद*
*किसानों सरकारी योजना से वंचित, खाद सरकारी दर से ज्यादा में हो रही बिक्री- नीरज*
//बिप्लब कुण्डू–की रिपोर्ट//
पखांजुर//ग्लोबल न्यूज़//
परलकोट धान का व मक्का का उत्पादन में छत्तीसगढ़ में एक अलग ही पहचान बना चुकी हैं जहा 99 प्रतिशत किसान है और सबसे ज्यादा उर्वरक खाद का उपयोग परलकोट क्षेत्र में किया जाता है लेकिन यहां किसानो पहले से ही सरकारी योजना का लाभ ना के बराबर मिलता रहा अभी भी किसान वंचित लाभ से वंचित है अभी धान रोपाई का समय चल रहा वही एक ओर सरकार राजीव गांधी योजना के तहत् किसानो को बीज मुहैया कराई जानी है लेकिन अभी तक से परलकोट के किसी किसान को यह उपलब्ध नहीं हो पाई जब अधिकारी से बात किया गया तो जवाब की अभी तक उपर से आया नही और कुछ आया है लेकिन वितरण नहीं हो पाया।सवाल यह है की जब अभी समय तक किसानों को बीज उपलब्ध नहीं किया गया तो मजबूरी में किसान निजी विक्रेता से खरीदी कर अपना खेत की रोपाई करने को मजबूर है आखिर सरकारी योजना का लाभ से किसान वंचित क्यों है? वही उर्वरक खाद की भरपूर मात्रा में लैंप्स और निजी विक्रेताओं के पास भरपूर भंडारण होने के वावजूद किसानों को सरकारी दर से ज्यादा में किसानों को उर्वरक खरीदी करना पड़ रहा है।जबकि पखांजूर में कृषि कार्यालय स्थित है जांच अधिकारी भी है वावजूद इनके नाक तले किसानों को ज्यादा दर भुगतान कर उर्वरक खरीदी करना मजबूरी बन चुकी है।जबकि कुल 28 लैंप्स में भंडारण 3926.56 टन रहा वही 2880.65 टन वितरण हो चुका है शेष 1045.65 टन है दूसरी ओर कुल 16 निजी उर्वरक विक्रेता के पास 2175.610 टन भंडारण है 784.410 टन का विक्रय हो चुका शेष 1391.200 टन है जो की पर्याप्त भंडारण है। वही एक ओर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है जहा संबंधित विभाग के अनुसार निजी उर्वरक विक्रेता मात्रा 16 है वही इसका दुगुना विक्रेताओं के पास उर्वरक खाद विक्रय हेतु उपलब्ध है इसके अलावा डुप्लीकेट उर्वरक की उपलब्धता भी इस क्षेत्र में देखा जाता है इसका शिकायत जब अधिकारियों से किया जाता है तब दुकानदार व इनके साथ मिलीभगत कर सरकारी नियम कानून बताकर मामला को बहाल कर दिया जाता है फिर वही विक्रेता द्वारा उससे ज्यादा दर से खाद विक्रय किया जाना क्षेत्र में आम बात बन गया।
किसान की बात फाउंडेशन नीरज राय द्वारा ऐसे घटना का घोरनिंदा किया साथ ही किसानों को राहत मिले, सरकारी योजना का लाभ मिले ऐसा विभागीय अधिकारियों से उम्मीद की बात की गई।

