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*स्वामी नर्मदानंद गिरि जी महाराज ने दिया सत्कर्म का संदेश*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट

अमरकंटक में गीता स्वाध्याय प्रशिक्षण वर्ग का समापन , स्वामी नर्मदानंद गिरि जी महाराज ने दिया सत्कर्म का संदेश

‘गीता का अध्ययन मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है , मनुष्य सदैव अच्छे कर्म करे’ — स्वामी जी

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित गीता स्वाध्याय आश्रम में विश्वगीताप्रतिष्ठानम द्वारा आयोजित गीता स्वाध्याय प्रशिक्षण वर्ग एवं क्षेत्रीय प्रगत वर्ग का सोमवार को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर समापन हुआ ।
इस अवसर पर आश्रम के अध्यक्ष एवं संचालक स्वामी नर्मदानंद गिरि जी महाराज ने गीता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ज्ञान अर्जित करने , सदाचार अपनाने और सत्कर्मों के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया ।

23 अक्टूबर को अश्विन शुक्ल त्रयोदशी के अवसर पर प्रारंभ हुए इस प्रशिक्षण वर्ग में गीता के अध्ययन , उसके जीवनोपयोगी उपदेशों और आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व पर केंद्रित गतिविधियां आयोजित की गईं । प्रशिक्षण का उद्देश्य गीता के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाना और लोगों को उसके सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा ।

समापन अवसर पर स्वामी नर्मदानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को सदैव ज्ञान अर्जित करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि ज्ञान ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है । भगवद्गीता का अध्ययन व्यक्ति को जीवन की सही दिशा दिखाने के साथ ही उसे अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देता है । गीता के उपदेशों को आत्मसात कर मनुष्य अपने विचारों , व्यवहार और आचरण में सकारात्मक बदलाव ला सकता है ।
स्वामीजी ने कहा कि भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन को सही दृष्टि देने वाला मार्गदर्शक है । इसके सिद्धांत मनुष्य को कर्तव्यबोध , सदाचार और सकारात्मक जीवनशैली की प्रेरणा देते हैं । उन्होंने लोगों से गीता का नियमित स्वाध्याय करने और उसके संदेशों को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया ।

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित समापन कार्यक्रम में गीता के ज्ञान को जीवन में अपनाने तथा आध्यात्मिक चेतना के साथ सत्कर्मों के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया । प्रशिक्षण वर्ग का समापन गीता के आदर्शों को आत्मसात कर जीवन को ज्ञान , सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा से परिपूर्ण बनाने के संकल्प के साथ हुआ ।
गीता का स्वाध्याय केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने और अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित करने का मार्ग है ।

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