*ब्रेकिंग न्यूज़ आमागोहन पंचायत का सचिव सस्पेंड लेकिन बड़े मगरमच्छ अभी भी बेखौफ?*

खोगसरा ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट

आमागोहन में 15वें वित्त का पैसा हजम, नाली कागजों में सचिव राजेश उइके सस्पेंड, लेकिन पैसा किसकी जेब में? – जांच अधूरी
15वें वित्त की राशि में खेल – सचिव सस्पेंड,अधिकारी एसडीओ इंजीनियर संबंधित बाबू सरपंच- पर कब कार्रवाई?
जवाब संतोषप्रद नहीं, लापरवाही जानबूझकर -किया जिला CEO का हंटर चला*
निलंबन तो झांकी है, वसूली अभी बाकी है
15वें वित्त के पैसे का हिसाब कौन देगा?*
भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कागजों में नाली, जमीन पर घोटाला, सचिव सस्पेंड
ग्लोबल न्यूज पर मोहर 15वां वित्त हजम करने वाला सचिव राजेश उइके निलंबित, अब सरपंच एवं उक्त राशि निकालने मे जो भी अधिकारी कर्मचारी संलिप्त है की बारी?
आमागोहन में 15वें वित्त का पैसा कागजों में हजम, नाली जमीन पर गायब — जिला पंचायत ने सचिव को किया सस्पेंड, पर बाकी सरपंच- एसडीओ इंजीनियर अन्य पर कब गिरेगी गाज?
बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत कोटा के ग्राम पंचायत आमागोहन में भ्रष्टाचार का एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। 15वें वित्त आयोग की लाखों की राशि से नाली निर्माण का काम कागजों में दिखाकर पैसा निकाल लिया गया, जबकि मौके पर नाली बनी ही नहीं। लगातार शिकायतों और *ग्लोबल न्यूज LIVE* द्वारा खबर प्रमुखता से उठाने के बाद जिला पंचायत बिलासपुर ने बड़ी कार्रवाई की है।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी आदेश क्र. 1618 दिनांक 03 सितंबर 2026 के तहत पंचायत सचिव राजेश कुमार उइके* को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जांच में क्या निकला?
जनपद पंचायत कोटा द्वारा कराई गई जांच में साफ हुआ कि 15वें वित्त मद से स्थल पर बिना नाली निर्माण किए ही राशि का आहरण कर लिया गया। यह सीधे-सीधे वित्तीय अनियमितता है। इसके बाद सचिव को 14 जुलाई 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। सचिव ने 20 जुलाई को अपना जवाब दिया, लेकिन आदेश में स्पष्ट लिखा है कि जवाब का अवलोकन एवं परीक्षण करने पर उसे संतोषप्रद एवं समाधानकारक नहीं पाया गया।
जिला पंचायत ने माना कि सचिव ने जानबूझकर अपने पद के कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरती और वित्तीय गड़बड़ी की। इस आधार पर *पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 के नियम 3(1) और पंचायत सेवा अनुशासन एवं अपील नियम 1999 के नियम 4* के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत कोटा रहेगा।
*सबसे बड़ा सवाल — सचिव अकेले कैसे कर सकता है?*
गांव में चर्चा है कि पंचायत में बिना सरपंच के हस्ताक्षर एवं अन्य और भी बिना तकनीकी सहायक / एसडीओ उपअभियंता के मेजरमेंट के पैसा निकल ही नहीं सकता। फिर केवल सचिव को सस्पेंड करके क्या पूरे मामले पर पर्दा डाला जा रहा है? शासन-प्रशासन की सबसे बड़ी लापरवाही यही है कि 15वें वित्त जैसी महत्वपूर्ण राशि की मॉनिटरिंग जनपद में बैठकर ही हो रही है, फील्ड में कोई सत्यापन नहीं।
ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले में राशि का रिकवरी, सरपंच की भूमिका की जांच और संबंधित एसडीओ उपअभियंता अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई हो। सिर्फ निलंबन से काम नहीं चलेगा, नाली मौके पर बननी चाहिए और दोषियों से पैसा वसूल होना चाहिए।
*ग्लोबल न्यूज LIVE का सवाल* जब जांच रिपोर्ट में ही साफ है कि नाली बनी नहीं और पैसा निकल गया तो एफआईआर क्यों नहीं? निलंबन तो प्रशासनिक खानापूर्ति है, असली न्याय कब मिलेगा? शासन के महत्वपूर्ण कीमती मद का

