*अमरकंटक में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मनाया गया श्रावणी पर्व*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
ब्राह्मणों एवं पुरोहितों ने मां नर्मदा के उद्गम कुंड , रामघाट में लगाई पुण्य की डुबकी , शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हुआ श्रावणी कर्म
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली /पवित्र नगरी अमरकंटक जो प्रदेश के प्रमुख धार्मिक , अध्यात्मिक तीर्थ स्थल में श्रावण पूर्णिमा एवं शतभिषा नक्षत्र के पावन संयोग पर श्रावणी पर्व श्रद्धा , आस्था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप धूमधाम से मनाया गया । इस अवसर पर नगर के संतो , ब्राह्मणों , पुरोहितों एवं विप्रजनों ने मां नर्मदा के रामघाट तट पर विधि-विधानपूर्वक श्रावणी कर्म (उपाकर्म) संपन्न कर ऋषि परंपरा और वेद संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया ।
अमरकंटक में प्रातःकाल से ही मां नर्मदा उद्गम कुंड एवं रामघाट में धार्मिक वातावरण देखने को मिला । संतों , पुरोहितों और ब्राह्मणों ने सर्वप्रथम मां नर्मदा में स्नान कर पुण्य की डुबकी लगाई । परंपरानुसार मिट्टी , गोमय , गौमूत्र , कुश , तिल , दूध , दही , घी पवित्र जल आदि से शुद्धिकरण स्नान किया गया । सनातन परंपरा में इन पदार्थों से स्नान को आत्मशुद्धि , प्रायश्चित और आध्यात्मिक पवित्रीकरण का प्रतीक माना जाता है । इसके उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रावणी कर्म प्रारंभ हुआ । वैदिक ऋचाओं की गूंज से पूरा नर्मदा तट आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो उठा । इस धार्मिक आयोजन में एक सैकड़ा से अधिक विप्रजन एवं श्रद्धालु शामिल हुए ।
शांति कुटी आश्रम के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज , संत स्वामी रामानुज दास , मृत्युंजय आश्रम के पंडित योगेश दुबे , पंडित बिहारी लाल तिवारी , पंडित संदीप उपाध्याय सहित अनेक संत एवं पुरोहित उपस्थित रहे । रामघाट में श्रावणी कर्म का आयोजन पंडित रवि महाराज (कोरबा) द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया ।
नर्मदा उद्गम कुंड में भी हुए धार्मिक अनुष्ठान
श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर मां नर्मदा के उद्गम स्थल स्थित पवित्र नर्मदा कुंड में भी श्रावणी कर्म का आयोजन किया गया।
नर्मदा मंदिर के पुजारी पंडित कामता प्रसाद द्विवेदी के नेतृत्व में ब्राह्मणों ने वैदिक विधि से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए । इस दौरान पंडित उमेश द्विवेदी , पंडित राजेश द्विवेदी , पंडित कमलेश द्विवेदी , पंडित जीतेंद्र द्विवेदी , पंडित धर्मेंद्र द्विवेदी , पंडित हर्ष द्विवेदी , पंडित रूपेश द्विवेदी एवं पंडित उत्तम द्विवेदी सहित अनेक विप्रजन उपस्थित रहे ।
ऋषि परंपरा , वेदाध्ययन और आत्मशुद्धि का पर्व
भारतीय सनातन परंपरा में श्रावण पूर्णिमा का विशेष महत्व माना गया है । श्रावणी पर्व को श्रावणी उपाकर्म एवं ऋषि तर्पण के रूप में भी जाना जाता है । यह पर्व ऋषि परंपरा , वेदाध्ययन , स्वाध्याय , आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण से जुड़ा हुआ है । श्रावणी कर्म के माध्यम से ब्राह्मण समाज वेद परंपरा के संरक्षण तथा ऋषियों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करता है । यह पर्व धर्म , संस्कार , ज्ञान और सदाचार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश देता है ।
श्रावण मास के अंतिम दिवस अमरकंटक में रामघाट से लेकर नर्मदा उद्गम कुंड तक धार्मिक आस्था , वैदिक संस्कृति और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला । मां नर्मदा के पावन तट पर संपन्न हुए श्रावणी पर्व ने एक बार फिर अमरकंटक की आध्यात्मिक पहचान को सुदृढ़ करते हुए सनातन संस्कृति की जीवंत विरासत को साकार कर दिया ।

