*फर्जी वाहन चालक भर्ती में जांच और एवं कार्यवाही की मांग*

*ग्लोबल न्यूज रिपोर्टर ओमप्रकाश नाग कोण्डागांव से*
*फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से वन विभाग में नियुक्ति का आरोप, वाहन चालक भर्ती मामले में मंजीत सिंह ने की जांच और कार्रवाई की मांग*
कोण्डागांव, 6 अगस्त।
केशकाल वनमंडल में भारी वाहन चालक पद पर हुई भर्ती को लेकर शिकायत सामने आई है। कोण्डागांव निवासी और वन विभाग में वाहन चालक के पद पर कार्यरत मंजीत सिंह चहल ने विक्की बंजारे पिता प्रेमदास बंजारे की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले में विक्की बंजारे सहित केशकाल वनमंडल के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
मंजीत सिंह ने अपने आवेदन में बताया कि वर्ष 2023 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय द्वारा भारी और हल्का वाहन चालक के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। केशकाल वनमंडल में भारी वाहन चालक के दो पदों के लिए उन्होंने भी आवेदन किया था। उनके अनुसार चयन प्रक्रिया के दौरान विक्की बंजारे द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र को पहले अमान्य किया गया था, क्योंकि प्रमाण पत्र मान्यता प्राप्त संस्था का नहीं पाया गया था। बाद में दावा-आपत्ति के निराकरण के दौरान भी अनुभव प्रमाण पत्र को अमान्य किए जाने का उल्लेख किया गया था।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि हीरा एग्रो राइस मिल कोण्डागांव के नाम से प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र संदेहास्पद था। मंजीत सिंह के अनुसार संबंधित संस्था की ओर से शिकायत में यह बताया गया कि विक्की बंजारे नाम का कोई व्यक्ति वहां भारी वाहन चालक के रूप में कार्यरत नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में अनुभव प्रमाण पत्र अमान्य पाए जाने के बावजूद वर्ष 2026 में विक्की बंजारे को भारी वाहन चालक के पद पर नियुक्ति दे दी गई, जो भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
मंजीत सिंह चहल ने बताया कि भर्ती की मेरिट सूची में पहले उनका नाम ऊपर था, लेकिन बाद में सूची में बदलाव कर विक्की बंजारे को प्रथम स्थान पर दर्शाया गया। उन्होंने कहा कि उनके पास भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज, वेबसाइट से प्राप्त जानकारी और आरटीआई के माध्यम से मिले रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने मामले को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में भी शिकायत दायर करने की जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि, मैं वर्ष 2013-14 से वन विभाग में कार्य कर रहा हूं और अच्छे कार्य के लिए मुझे प्रशस्ति पत्र भी मिल चुका है। मेरे साथ अन्याय हुआ है। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं इस मामले में अब शिकायतकर्ता ने राज्यपाल, एंटी करप्शन ब्यूरो, कलेक्टर कोण्डागांव और पुलिस अधीक्षक कोण्डागांव को आवेदन भेजकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। मामले में वन विभाग का पक्ष सामने नहीं आया है।
