
*रमन लाल अग्रवाल ने किया देहदान*
भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट
*लोकतंत्र सेनानी ने देहदान कर दिया समाज को सबसे बड़ा दान:- शिवरतन शर्मा ने की भूरी-भूरी प्रशंसा*
*भाटापारा के 80 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी रमन लाल अग्रवाल ने किया देहदान का संकल्प, बोले – मरने के बाद भी देश के काम आऊंगा*
भाटापारा 14 जून/ त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय मिसाल पेश करते हुए भाटापारा के प्रतिष्ठित नागरिक एवं पूर्व मिशा बंदी 80 वर्षीय रमन लाल अग्रवाल ने मृत्यु उपरांत अपना संपूर्ण शरीर मेडिकल शिक्षा के लिए दान करने का संकल्प लिया है। गुरुवार, 12 जून 2026 को उन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के शरीर रचना विज्ञान विभाग में उपस्थित होकर विधिवत देहदान घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए.।
कौन हैं रमन लाल अग्रवालकृष्णा नगर, नयापारा वार्ड, भाटापारा निवासी रमन लाल अग्रवाल सुपुत्र स्व. राधेश्याम अग्रवाल सिर्फ एक आम नागरिक नहीं हैं। वर्ष 1975 में देश में लगे आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुखर होकर संघर्ष करने पर उन्हें मिशा के तहत गिरफ्तार कर महीने तक जेल में रखा गया था। जेल की सलाखों के पीछे यातनाएं सहने के बाद भी लोकतंत्र के प्रति उनका संकल्प डिगा नहीं। रिहा होने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन सामाजिक कार्यों, जनसेवा और राष्ट्र निर्माण को समर्पित कर दिया। आज 80 वर्ष की आयु पार करने के बाद भी समाज सेवा का उनका जज्बा युवाओं जैसा ही है।
यह त्याग शब्दों से परे हैशिवरतन शर्मा ने की भूरी-भूरी प्रशंसा
इस प्रेरणादायी निर्णय पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ भाजपा नेता शिवरतन शर्मा ने दूरभाष पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर कहा की रमन लाल अग्रवाल ने जीवनभर राष्ट्रधर्म निभाया है। आपातकाल में लोकतंत्र के लिए जेल की यातनाएं सहीं और आज मृत्यु के बाद भी अपना शरीर समाज को समर्पित कर दिया। यह त्याग शब्दों से परे है। वे सच्चे अर्थों में लोकतंत्र सेनानी हैं। भाटापारा की माटी को ऐसे सपूतों पर गर्व है। उनका यह कदम मेडिकल छात्रों के लिए वरदान साबित होगा शिवरतन शर्मा ने आगे कहा कि रमन लाल जी जैसे लोग ही समाज की असली धरोहर हैं। उन्होंने अग्रवाल परिवार को भी इस पुनीत कार्य के लिए साधुवाद दिया और कहा कि ऐसे संस्कार ही परिवारों को महान बनाते हैं।
डॉक्टर बनने वाले बच्चे मेरी देह से रमन लाल अग्रवाल देहदान का संकल्प लेने के बाद भावुक हुए रमन लाल अग्रवाल ने कहा मेरा शरीर मरने के बाद किसी के काम आ जाए, इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा। डॉक्टर बनने वाले बच्चे मेरी देह से शरीर रचना सीखेंगे, फिर किसी का जीवन बचाएंगे। आपातकाल में जिंदा रहते हुए देश के लिए जेल गया,अब जाने के बाद भी देश के काम आऊंगा मेरा जीवन और मेरी मृत्यु दोनों सार्थक हो जाएंगे घोषणा पत्र में उन्होंने स्पष्ट उल्लेख किया है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शरीर पर परिवार का कोई भी कानूनी या सामाजिक अधिकार नहीं होगा और उसे तत्काल पं. जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के शरीर रचना विज्ञान विभाग को सौंप दिया जाए। उनके सुपुत्र अनिल कुमार अग्रवाल ने साक्षी के रूप में हस्ताक्षर कर पिता के इस अंतिम संकल्प को पूरी निष्ठा से पूरा करने की जिम्मेदारी ली है क्यों अहम है यह देहदान मेडिकल शिक्षा में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को मानव शरीर रचना यानी एनाटॉमी सीखने के लिए कैडेवर मानव शरीर की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। कैडेवर के अभाव में छात्र केवल किताबों और मॉडल से पढ़ते हैं, जिससे उनकी प्रैक्टिकल जानकारी अधूरी रह जाती है। एक देहदान से 8 से 10 भावी डॉक्टर प्रशिक्षित होकर हजारों मरीजों का जीवन बचाते हैं। छत्तीसगढ़ में कैडेवर की भारी कमी है। ऐसे में रमन लाल जी का यह निर्णय सैकड़ों मरीजों के लिए जीवनदायी साबित होगा।रमन लाल अग्रवाल का यह निर्णय न केवल भाटापारा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उन्होंने साबित कर दिया कि सच्चा लोकतंत्र सेनानी और सच्चा देशभक्त अंतिम सांस तक और उसके बाद भी राष्ट्र के बारे में सोचता है
