
*ग्राम पंचयतकतों की भेंट चढ़ी आंगनबाड़ी योजना में गुणवत्ता और स्थान पर सवाल*

खोगसरा ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट
विभिन्न ग्राम पंचायतों में महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वाकांक्षी आंगनबाड़ी भवन योजना कोटा विकासखंड में कागजों तक सिमट कर रह गई है। राशि स्वीकृत होने के बाद भी कई पंचायतों में निर्माण शुरू नहीं हुआ है। कहीं भूमि विवाद है तो कहीं भवन बसाहट से 800 मीटर दूर, रेल लाइन के पार बनाए जा रहे हैं। नतीजा 2 साल से बंद केंद्रों में बच्चे पंचायत भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।मुख्य अनियमितताएं
आमागोहन- विवाद में फंसा निर्माण
साल से जर्जर भवन बंद। नई राशि मिलने के बाद भी पंचायत ने पुरानी जगह छोड़कर निजी विवादित भूमि चुन ली। ग्रामीण विरोध में निर्माण ठप। बच्चे पंचायत भवन में शिफ्ट। ग्रामपंचयत तुलुफ ने प्रस्ताव बनाकर बसाहट से 800 मीटर दूर रेल लाइन पार 4 साल से जर्जर भवन। सरपंच ने स्कूल परिसर की जगह गांव से दूर रेल लाइन के पार जमीन चुनी। ग्रामीणों का आरोप – गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों का रोज आना-जाना जोखिम भरा। निर्माण में हाथ से टूटने वाली कमजोर ईंटें इस्तेमाल होने का भी आरोप।
ग्राम पंचयत मोहली-आश्रित गांव बगबूड़: राशि आई, निर्माण नहीं
दो भवनों की राशि जारी। बगबूड़ में कम आबादी का हवाला देकर कुछ लोग लठौरी में शिफ्ट चाहते हैं। इसी खींचतान में दोनों भवन अटके।
ग्राम पंचयत टाटीधार आंगनवाड़ी भवन बना तो दिया पर अधूरा भवन तैयार पर पुताई-रंगाई बाकी। विभाग ने हैंडओवर नहीं लिया। ग्रामीणों ने घटिया ईंट का आरोप लगाया।
नई शिक्षा नीति पर सवाल
NEP के तहत आंगनबाड़ी को स्कूल परिसर के पास बनाने का नियम है। पर कोटा में उल्टा – स्कूल से दूर, रेल लाइन पार भवन बन रहे हैं। प्रारंभिक शिक्षा की नींव ही कमजोर पड़ रही है।
परियोजना अधिकारी सुरुचि श्याम ने माना कि कई भवन समय पर पूरे नहीं हुए। बोलीं – निर्माण एजेंसी पंचायत है। सीईओ जनपद को शिकायत करेंगे। गुणवत्ताहीन भवनों का निरीक्षण कराकर मानक पूरे होने पर ही हैंडओवर लेंगे।
ग्रामीणों की पीड़ा प्रदीप शर्मा बसाहट के पास होना चाहिए। रेल लाइन पार बच्चों की जान जोखिम में
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिना केंद्र के बच्चों को संभालना मुश्किल। पंचायत भवन में काम चलाना पड़ता है
अब देखना है कि प्रशासन जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और बच्चों को सुरक्षित केंद्र कब मिलते हैं।




