करगी रोड कोटाग्लोबल ब्रेकिंग न्यूज़छत्तीसगढ़संपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*पुरानी पीढ़ी इंतजार में चली गई नई पीढ़ी आज भी कीचड़ में करहीकछार के आश्रित ग्रामों की सड़क कब बनेगी?*

कोटा/ग्राम पंचायत करहीकछार ग्लोबल न्यूज नारायण यादव रिपोर्ट

आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क को तरस रहे ग्रामीण

कोटा – मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हो या संपर्क मार्ग की सुविधा, आम ग्रामीणों के लिए इन्हें हासिल करना आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है। कोटा जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत करहीकछार के आश्रित ग्राम केकराडीह, खोलीपारा में लगभग पंद्रह सौ से अधिक की आबादी पिछले कई दशकों से पक्की सड़क की मांग कर रही है, लेकिन उनकी समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

ग्रामीणों के अनुसार, रतखंडी पंचायत के ग्राम बरर से केकराडीह-खोलीपारा की ओर जाने वाला करीब चार किलोमीटर का मार्ग आज भी कच्चा और गड्ढों से भरा हुआ है। बारिश के दिनों में इस सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। जगह-जगह कीचड़ और पानी भरने से मोटरसाइकिल, साइकिल तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।

बारिश में टूट जाता है एक गांव से दूसरे गांव का संपर्क

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान अरपा नदी पर बने एनीकट के ऊपर से पानी बहने लगता है जिससे गांव का संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। ऐसे समय में जरूरी कामों के लिए बाहर निकलने में भारी परेशानी होती है। सबसे बड़ी चिंता बीमार और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने को लेकर रहती है। कीचड़ और पानी के कारण कई बार एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।

चुनाव के समय वादे, बाद में भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि

ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि उनकी सड़क समस्या को प्राथमिकता से हल करने का आश्वासन देते रहे हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद कोई कार्रवाई नहीं होती। वर्षों से आश्वासन मिलने के बावजूद सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के कई गांवों में पक्की सड़कें बन चुकी हैं, लेकिन केकराडीह और खोलीपारा के लोग आज भी कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बुजुर्ग सड़क निर्माण की मांग करते-करते दुनिया से चले गए, लेकिन गांव की सड़क आज भी जस की तस है। नई पीढ़ी भी उसी समस्या का सामना कर रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि महज आश्वासन देने के बजाय करीब तीन से चार किलोमीटर के इस मार्ग का स्थायी समाधान करते हुए पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।

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