*ग्लोबल ब्रेकिंग न्यूज़ वन अधिकार का पट्टा फिर भी धान बेचने से वंचित बैगा परिवार*

ग्राउंड रिपोर्टर प्रदीप शर्मा, ग्लोबल न्यूज खोंगसरा*
कोटा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत टाटीधार का मामला

वन अधिकार का पट्टा फिर भी धान बेचने से वंचित बैगा परिवार
260 से अधिक वन अधिकार पत्र, लेकिन करीब 15 परिवार ही बेच पा रहे धान! प्रशासनिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
वन अधिकार कानून के तहत वर्षों से जंगल में निवासरत आदिवासी परिवारों को आजीविका के लिए पट्टे दिए गए, लेकिन टाटीधार में बैगा परिवार पट्टा होने के बावजूद अपनी ही जमीन पर उगाया धान सरकारी खरीदी में नहीं बेच पा रहे हैं।
ग्राम सरपंच प्रतिनिधि संगीता सम्मार सिंह के अनुसार गांव में 260 से अधिक वन अधिकार पत्र बांटे गए हैं, लेकिन आज केवल 15 परिवार ही धान बेच पा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि भौतिक सत्यापन नहीं किया जा रहा।
पटवारी ने कहा पटवारी प्रियंका बैगा का कहना है कि उनके पास राजस्व विभाग से आई सूची में जो नाम हैं, उन्हीं का सत्यापन किया जा रहा है। सूची से बाहर के पट्टों को उन्होंने फर्जी/अवैध तक बताया और कहा कि परिवार कलेक्टर से संपर्क करें। वहीं उन्होंने ये भी कहा कि बैगा परिवार अपने पट्टे से दूसरों का धान बेचते हैं। दो विरोधाभासी बयानों से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने कहा ये सरकारी भेदभाव और अन्याय है। अगर पट्टा वैध है और परिवार उसी जमीन पर खेती कर रहा है तो केवल रिकॉर्ड की कमी से उसे धान बिक्री से रोकना वन अधिकार कानून 2006 के उद्देश्य के खिलाफ है।
मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत (बेलगहना) ने कहा कि मामला गंभीर है, उच्च अधिकारियों को अवगत कराकर बैगा परिवारों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
अब मामला कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री और वन मंत्री तक पहुंचाया जाएगा।
