*ब्रेकिंग न्यूज़ खोगसरा खाट से अस्पताल तक जच्चा बच्चा सुरक्षित*

खोगसरा ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट
*बिलासपुर के अंतिम गांवों में सुविधाओं का टोटा गर्भवती को खाट पर ढोया पेंड्राअस्पताल ने बचाई जान*
*गौरखुरी से पेंड्रा तक रातभर जद्दोजहद सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने उठाए सवाल*
*खोंगसरा (गौरखुरी) कोटा ग्लोबल न्यूज
गौरखुरी की गर्भवती का GPM जिला चिकित्सालय में सफल प्रसव, नन्ही परी का जन्म। रातभर की जद्दोजहद के बाद मिली खुशी।

बिलासपुर जिले के अंतिम छोर पर बसे गांवों में मूलभूत सुविधाओं की पोल एक बार फिर खुल गई। गौरखुरी में एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिवार को रातभर खाट का सहारा लेना पड़ा।
घटना 20 सितंबर की रात 1 बजे की है गौरखुरी निवासी विशाल बैगा की बहन को प्रसव पीड़ा हुई। रात में न एंबुलेंस मिली न वाहन। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा को फोन किया गया।
परेशानी यह थी कि घर तक सड़क ही नहीं है। परिवार को करीब 200 मीटर तक महिला को खाट पर उठाकर ले जाना पड़ा, फिर बाइक से टिगड्डा चौक, और वहां से निजी वाहन से अस्पताल।
17 KM दूर खोंगसरा, फिर भी पेंड्रा क्यों?
गौरखुरी से खोंगसरा 17 किमी है, लेकिन खोंगसरा PHC में स्टाफ, आपातकालीन सेवा और एंबुलेंस की कमी और खोंगसरा से बेलगहना-कोटा रोड की बदहाली के कारण परिवार ने रात में जोखिम नहीं लिया। प्रदीप शर्मा की सलाह पर महिला को
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की मदद से सुरक्षित सामान्य प्रसव हुआ और बेटी का जन्म हुआ।
अब जच्चा-बच्चा दोनों सकुशल घर लौट आए हैं
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने कहा एक मां को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट, बाइक और निजी गाड़ी का सहारा लेना पड़े, तो यह सिस्टम पर बड़ा सवाल है। उन्होंने अंतिम गांवों में पक्की सड़क, 24×7 PHC और एंबुलेंस व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
कई बार बिलासपुर के अंतिम गांव के लोगों को अपने ही जिले से ज्यादा दूसरे जिले (पेंड्रा) की व्यवस्था पर भरोसा करना पड़ता है।
निष्कर्ष यह घटना तो खुशी में बदली, लेकिन सवाल वहीं है अंतिम छोर के गांवों को मूलभूत हक कब मिलेगा?
