*म. प्र ब्रेकिंग भ्रष्टाचार के खिलाफ खबर लिखने पर पत्रकार पर प्राणघातक हमला*

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मध्य प्रदेश ब्रेकिंग न्यूज़ छतरपुर जिले के बकस्वाहा नगर पंचायत क्षेत्र के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर चोट
*भ्रष्टाचार उजागर करना पड़ा भारी? नगर परिषद अध्यक्ष के परिजनों पर आरोप, हालत नाजुक*
ग्लोबल न्यूज लाइव वेब —मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से पत्रकारिता और शासन-प्रशासन को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। बकस्वाहा नगर पंचायत की वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमितताओं की खबरें प्रकाशित करने पर एक पत्रकार पर जानलेवा हमला किया गया है।
*घटना का विवरण*
पीड़ित पत्रकार मनीष जैन निवासी बकस्वाहा, जिला छतरपुर हैं। जानकारी के अनुसार 24 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 11 बजे जब वे अपनी पत्नी सीमा जैन के साथ जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के दौरान पूजा कर उपवास पर थे, तभी नगर परिषद अध्यक्ष किरण सोनी के घर के सामने 9-10 लोगों ने उन्हें घेर लिया।
आरोप है कि लाठी-डंडा और धारदार हथियारों से उन पर प्राणघातक हमला किया गया।
खबरों में आरोपी के तौर पर मदन गोपाल, सदन गोपाल, बृजगोपाल, योगेश, संकल्प, अनिरुद्ध, बिट्टू, शिवा उर्फ सालू सोनी, प्रांशू और अन्य अज्ञात का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि सभी आरोपी नगर परिषद अध्यक्ष के परिजन हैं और पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष नीलू सोनी से जुड़े हैं।
पत्रकार मनीष जैन लगातार नगर पंचायत में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे, इसी रंजिश में हमले की आशंका जताई जा रही है।
वर्तमान स्थिति
1. हमले में पत्रकार मनीष जैन गंभीर रूप से घायल हैं, हाथ-पैर में धारदार हथियार के गहरे घाव हैं। उन्हें इलाज के लिए *बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सागर* में भर्ती कराया गया है, हालत नाजुक बनी हुई है।
2. घटना के विरोध में 25 सितंबर 2026 को सकल दिगंबर जैन समाज और CAT (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स)* ने छतरपुर SP कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कठोर धाराओं में FIR दर्ज करने और घटनास्थल के CCTV फुटेज को सुरक्षित करने की मांग की गई है।
3. अभी तक पुलिस द्वारा FIR दर्ज और गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि प्रमुख पोर्टलों पर नहीं आई है, जिससे पत्रकार संगठनों और व्यापारिक संगठनों में भारी आक्रोश है।
सत्ता के संरक्षण में पत्रकार पर हमले की इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकार कल्याण परिषद ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन पर दबाव बरकरार, कठोर कार्रवाई लंबित।*
