अमरकंटक ग्लोबल न्यूजसंपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*अमरकंटक में श्रावण मास भर शिवमय रहेगा रामघाट*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट

वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच नमक-चमक रुद्राभिषेक,महामृत्युंजय जाप और दैनिक हवन जारी


अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक के उत्तर तट स्थित रामघाट इन दिनों पूर्णतः शिवमय वातावरण में सराबोर है । पावन श्रावण मास के अवसर पर यहां वैदिक परंपराओं के अनुरूप नमक-चमक रुद्राभिषेक , महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा दैनिक यज्ञ-हवन का भव्य आयोजन श्रावण मास के प्रथम दिन से निरंतर जारी है । पूरे श्रावण मास तक चलने वाले इस अनुष्ठान से रामघाट सहित अमरकंटक क्षेत्र वैदिक मंत्रोच्चार , हवन की पावन सुगंध और शिव आराधना से गुंजायमान बना हुआ है ।

आयोजन में पांच विद्वान ब्राह्मण यज्ञ एवं हवन कार्य में तथा छह ब्राह्मण महामृत्युंजय मंत्र जाप में संलग्न हैं । वैदिक विधि-विधान से संपन्न हो रहे इस महाअनुष्ठान में भगवान शिव की आराधना के साथ विश्व शांति , लोककल्याण , सुख-समृद्धि एवं आरोग्यता की मंगलकामना की जा रही है ।

आयोजकों के अनुसार श्रावण मास के दौरान सवा पांच लाख महामृत्युंजय मंत्रों का जाप संपन्न कराया जाएगा । प्रतिदिन रुद्राभिषेक , पूजन-अर्चन , मंत्र जाप और हवन का क्रम जारी है जिससे रामघाट का वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक एवं भक्तिमय बना हुआ है । विशेष बात यह है कि यह समूचा अनुष्ठान बिना किसी आडंबर और शोर-शराबे के श्रद्धा एवं साधना भाव से संपन्न किया जा रहा है ।

यह धार्मिक आयोजन नर्मदा परिक्रमावासी संत स्वामी पूरण दास जी महाराज (मौनी बाबा) के सान्निध्य में संचालित हो रहा है । स्वामी पूरण दास जी महाराज राजस्थान के जयपुर समीप नरैना ग्राम स्थित आश्रम सेवा ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं ।

उन्होंने लगभग दस वर्ष पूर्व ओंकारेश्वर से नर्मदा परिक्रमा प्रारंभ की थी तब से आज तक उन्होंने तप , साधना एवं धर्म प्रचार में निरंतर सक्रिय हैं ।
स्वामी जी अब तक दक्षिण तट पर दो चातुर्मास पूर्ण कर चुके हैं तथा वर्तमान में उत्तर तट पर उनका आठवां चातुर्मास चल रहा है । इसके पश्चात दक्षिण तट पर छह और चातुर्मास करने का उनका संकल्प है । जहां भी वे चातुर्मास करते हैं वहां यज्ञ , हवन , पूजन एवं धार्मिक जागरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ।

अमरकंटक में उनके मार्गदर्शन में निर्मित यज्ञशाला में प्रतिदिन यज्ञ संपन्न हो रहा है , वहीं प्रातःकाल रामघाट स्थित शिव मंदिर में वैदिक ब्राह्मणों द्वारा रुद्राभिषेक किया जाता है साथ ही महामृत्युंजय का जाप चलता रहता है । स्वामी पूरण दास जी महाराज ने बताया कि इस अनुष्ठान में महर्षि विद्यालय जबलपुर से पधारे 11 विद्वान ब्राह्मण वैदिक कर्मकांड संपन्न करा रहे हैं ।
उन्होंने बताया कि आगामी 11 से 20 अक्टूबर 2026 तक नौ दिवसीय रामघाट नर्मदा उत्तर तट पर भव्य श्रीराम यज्ञ का आयोजन भी प्रस्तावित है ।

नमक-चमक रुद्राभिषेक का विशेष महत्व
वैदिक ब्राह्मणों ने बताया कि नमक-चमक रुद्राभिषेक भगवान शिव की आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान है । इसमें यजुर्वेद के श्रीरुद्रम के दो भाग—नमकम् और चमकम्—का पाठ करते हुए शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। “नमः” शब्द की बार-बार आवृत्ति होने से इसे नमकम् तथा “च मे” शब्द की पुनरावृत्ति के कारण इसे चमकम् कहा जाता है ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नमक-चमक रुद्राभिषेक एवं महामृत्युंजय मंत्र जाप का संयुक्त अनुष्ठान दीर्घायु , आरोग्य , सुख-समृद्धि , आध्यात्मिक उन्नति और लोककल्याण के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है । श्रावण मास में इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है ।

श्रावण मास के इस विशेष आयोजन में स्थानीय श्रद्धालुओं , सेवक बंधुओं तथा दूर-दराज से आने वाले भक्तों की निरंतर सहभागिता बनी हुई है । वैदिक मंत्रों की गूंज और शिवभक्ति के इस अनुपम संगम ने रामघाट को इन दिनों एक दिव्य आध्यात्मिक केंद्र का स्वरूप प्रदान कर दिया है ।

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