*अमरकंटक की शाम और यादव की समोसी का अनोखा स्वाद*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
हर शाम उमड़ता है स्वाद प्रेमियों का हुजूम
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक में शाम ढलते ही नर्मदा मंदिर मार्ग का माहौल कुछ अलग ही नजर आता है । यहां स्थित यादव जी की समोसी की दुकान पर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ दूर-दराज से आए पर्यटकों की भीड़ जुटने लगती है । गर्मागर्म समोसी और ताजे गुलाबजामुन की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है जिसके चलते प्रतिदिन शाम के समय दुकान पर ग्राहकों का जमावड़ा लगा रहता है ।
दुकान संचालक नागेश्वर यादव और उनके परिवार के सदस्य वर्षों से इस पारंपरिक स्वाद को बनाए हुए हैं । परिवार के सभी सदस्य मिलकर प्रतिदिन संध्या समय ताजा समोसी और गुलाबजामुन तैयार करते हैं । विशेष बात यह है कि यहां मिलने वाली छोटे आकार की समोसी अपने अनूठे स्वाद , कुरकुरेपन और गुणवत्ता के कारण लोगों की पहली पसंद बनी हुई है । अमरकंटक आने वाले अनेक पर्यटक भी यहां पहुंचकर इस स्थानीय स्वाद का आनंद लेना नहीं भूलते ।
बरसात के मौसम में जब अमरकंटक की वादियां हरियाली से आच्छादित रहती हैं और रिमझिम फुहारें वातावरण को खुशनुमा बना देती हैं , तब गर्म समोसी का स्वाद लोगों को विशेष आनंद प्रदान करता है । ठंड के दिनों में भी यहां की रौनक देखने लायक होती है । कई परिवार और मित्र समूह शाम की सैर के दौरान यहां रुककर नाश्ते का आनंद लेते हैं ।
पूर्व पार्षद श्यामलाल सेन बताते हैं कि नागेश्वर यादव का परिवार लंबे समय से समोसी बनाकर लोगों को स्वादिष्ट नाश्ता उपलब्ध करा रहा है ।
वर्षों की मेहनत , गुणवत्ता और ग्राहकों के प्रति आत्मीय व्यवहार के कारण ही उनकी दुकान ने अपनी अलग पहचान बनाई है ।
उन्होंने कहा कि अमरकंटक की शाम और यादव जी की दुकान की समोसी अब एक तरह से स्थानीय पहचान बन चुकी है ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अमरकंटक की धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां का यह स्वाद भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है । यही वजह है कि हर शाम यादव जी की दुकान पर स्वाद प्रेमियों का हुजूम उमड़ पड़ता है और गर्मागर्म समोसी का स्वाद लेने के लिए लोगों को इंतजार तक करना पड़ता है । कड़ाही से समोसी निकलते ही गायब हो जाती है ।
