
*रमन लोक कला महोत्सव लोक में राम की प्रस्तुति से दर्शकों को मिली सांस्कृतिक की अनुभूति*
*कोटा ग्लोबल न्यूज नारायण यादव की रिपोर्ट*
• डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय में लोक में राम विषय पर कई राज्यों के लोक कलाकारों ने दी प्रस्तुति, राम के जीवन को लोक कला से सबके सामने रखा। यह कार्यक्रम 13 से 16 फरवरी तक चार दिवसीय रमन लोक कला महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

• इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर वर्णिका शर्मा ने राम के महत्व को बताते हुए कहा कि राम भाषण का विषय नहीं धारण का विषय है। उन्होंने कहा कि हमें राम की तपस्या को अपने आचरण में स्वीकार करना चाहिए।

• अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि राम से हमें तपस्या, कुशल संगठक, संतुलित जीवन, कठिन परिश्रम, में धैर्य और जन भावनाओं का सम्मान करना सीखना चाहिए।

• डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि तुलसीदास जी को यह लग गया था कि भगवान राम को लोक भाषा में ही ज्यादा समझ जा सकेगा, इसलिए उन्होंने लोक भाषा में रामचरितमानस की रचना की। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में 300 से अधिक रामायण लिखी गई है।
• इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने कहा कि डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय केवल शिक्षा ही नहीं जीवन संस्कृति सभ्यता लोक कला लोक व्यवहार की जानकारी भी देता है।
• कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के साथ उड़ीसा, पश्चिम बंगला, बिहार, राजस्थान, झारखंड, असम सहित अनेक राज्यों के लोक कलाकारों ने भाग लिया
