छत्तीसगढ़भाटापारासंपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*कृषक जीवन ज्योति योजना बनी किसानों की सबसे बड़ी ताकत*

*भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट*

*निःशुल्क बिजली से बदली खेती की तस्वीर*

*8 लाख 41 हजार से अधिक कृषक परिवारों को सीधा लाभ*

भाटापारा 26  दिसंबर/ रायपुर कभी बिजली बिल का डर, कभी सिंचाई के लिए कर्ज, ये हालात अब छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों के लिए बीते कल की बात हो गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित कृषक जीवन ज्योति योजना ने खेती की लागत घटाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। 5 अश्वशक्ति तक के कृषि पंपों को निःशुल्क और रियायती बिजली ने खेतों तक खुशहाली पहुंचाई है।
इस योजना के तहत 3 अश्वशक्ति तक के कृषि पंपों को 6000 यूनिट और 3 से 5 अश्वशक्ति के पंपों को 7500 यूनिट प्रति वर्ष तक बिजली बिल में छूट दी जा रही है। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि किसानों को सिंचाई के लिए अलग से खर्च नहीं करना पड़ रहा है। नतीजतन फसलों की समय पर सिंचाई और उत्पादन में वृद्धि हुई है।
योजना की सबसे खास बात है फ्लैट रेट विकल्प। इस विकल्प को चुनने वाले किसानों को बिजली खपत की कोई सीमा नहीं है। उन्हें सिर्फ 100 रूपए प्रति अश्वशक्ति प्रति माह की दर से बिल का भुगतान करना होता है। वहीं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए बिजली खपत पर कोई सीमा है, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को सीधी राहत मिली है।
राज्य शासन ने बीते दो वर्षों में इस योजना के लिए करीब 13 हजार 523 करोड़ रूपए का अनुदान दिया है। वर्तमान में प्रदेश के 8 लाख 41 हजार कृषि पंप उपभोक्ता इस योजना का लाभ ले रहे हैं। वर्ष 2025-26 के लिए भी शासन ने 3500 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया है, जिससे योजना को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।
खेती की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए योजना में द्वितीय और अतिरिक्त पंपों के लिए भी सरल दरें तय की गई हैं। 5 अश्वशक्ति तक के द्वितीय पंप पर 200 रूपए प्रति अश्वशक्ति प्रतिमाह और तृतीय व अन्य पंपों के लिए 300 रूपए प्रति अश्वशक्ति प्रतिमाह की दर से भुगतान की सुविधा दी जा रही है। किसानों का कहना है कि पहले बिजली बिल के कारण खेती घाटे का सौदा लगती थी, लेकिन अब निःशुल्क बिजली से सिंचाई आसान हो गई है। इससे बची रकम वे बीज, खाद और आधुनिक तकनीक पर खर्च कर पा रहे हैं।
कृषक जीवन ज्योति योजना ने यह साबित कर दिया है कि सही नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। निःशुल्क बिजली के सहारे छत्तीसगढ़ के खेत आज सिर्फ फसल नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की कहानी भी उगा रहे हैं।

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