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*कल्याण सेवा आश्रम में 108 श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का शुभारंभ*

*अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट*

कल्याण सेवा आश्रम में दिव्य शुभारंभ 31वां अष्टोत्तर शत 108 श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव

अमरकंटक – माँ नर्मदा जी की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक के पावन पवित्र धाम के  पुण्यभूमि पर एक बार फिर हरि-नाम , वेद मंत्रों और भक्ति रस से गूँज उठा नगर ।
कल्याण सेवा आश्रम में सप्तदिवसीय 31वां अष्टोत्तर शत 108 श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव – 2025 का दिव्य शुभारंभ श्रद्धा , भक्ति और वैदिक विधि – विधान के साथ संपन्न हुआ ।

महोत्सव के प्रथम दिवस दिन शुक्रवार 26 दिसंबर 2025 को प्रातः कल्याण सेवा आश्रम परिसर से निकाली गई भव्य एवं अलौकिक कलश यात्रा । इस शोभायात्रा ने संपूर्ण अमरकंटक को भक्तिमय बना दिया । पारंपरिक वेशभूषा में सजे पुरुष-महिलाएँ , सिर पर कलश धारण किए , मधुर भजन-कीर्तन करते हुए पतित पावनी माँ नर्मदा के उद्गम स्थल तक नगर भ्रमण करते हुए पहुँचे । वहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण एवं कलशों का पूजन-अर्चन एवं महाआरती की गई । तत्पश्चात कलशों को लेकर कथा स्थल पर विधिवत स्थापना की गई । जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा ।
यह विराट धार्मिक अनुष्ठान श्री भागवत सेवा संस्थान , हावड़ा (कोलकाता) एवं वृंदावन के भक्त समुदाय के पावन सहयोग से आयोजित किया जा रहा है । कथा व्यास पंडित श्री राधेश्याम जी शास्त्री महाराज (वृंदावन) द्वारा सुमधुर संगीत एवं भावपूर्ण वाणी में श्रीमद् भागवत कथा का अमृतपान कराया जा रहा है । कथा वाचन में आचार्य श्री मुरारी जी दाधीच (बेंगलुरु) का भी विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है ।
श्रीमद् भागवत कथा प्रतिदिन प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक निरंतर 01 जनवरी 2026 तक चलेगी । इस दिव्य आयोजन में पश्चिम बंगाल के कोलकाता एवं हावड़ा से आए एक हजार से अधिक भक्त श्रद्धालु भागवत के कथारस में सराबोर होंगे ।
महोत्सव की आध्यात्मिक शोभा को और अधिक समृद्ध करते हुए नानी बाई मायरो का चार दिवसीय विशेष आयोजन भी किया जा रहा है । कोलकाता की सुप्रसिद्ध नृत्य-नाटिका मंडली द्वारा यह भावपूर्ण प्रस्तुति 27 दिसंबर से 30 दिसंबर तक प्रतिदिन सायं 6:30 बजे से प्रस्तुत की जाएगी ।
प्रथम दिवस के कथा प्रसंग में पूज्य कथा व्यास पंडित श्री राधेश्याम शास्त्री जी महाराज ने भावपूर्ण शब्दों में कहा—
“श्रीमद् भागवत भगवान की सजीव कृपा है। इससे जो भी माँगा जाए—धन , संतान , सुख , मोक्ष—सब प्राप्त होता है और यदि कोई गोविंद को माँग ले  तो वे स्वयं भक्त के द्वार तक चलकर आ जाते हैं।”
उन्होंने भक्तों से आह्वान किया कि कथा श्रवण के समय क्रोध , अहंकार और सांसारिक आसक्तियों का परित्याग कर  चित्त को श्रीहरि के चरणों में स्थिर करें । उन्होंने कहा कि भक्ति का आरंभ बचपन से हो , युवावस्था में हो या जीवन के किसी भी चरण में—भगवत् स्मरण सदैव कल्याणकारी होता है। अमरकंटक जैसी पुण्यभूमि पर तन-मन और प्राण से कथा श्रवण करने का सौभाग्य दुर्लभ जनों को मिलता है ।

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