*स्वच्छ भारत मिशन में ₹71,600 के भुगतान अंतर पर उठे सवाल*

आमागोहन ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट
12 हितग्राहियों को ₹12 हजार के हिसाब से मिलनी थी ₹1.44 लाख की राशि, 11 मार्च 2019 को ₹72,400 के चेक का भुगतान; पांच साल बाद भी शेष राशि का इंतजार
-कोटा/आमागोहन– ग्राम पंचायत आमागोहन, विकासखंड कोटा, जिला बिलासपुर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण की प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार 12 हितग्राहियों को ₹12,000 प्रति हितग्राही के हिसाब से कुल ₹1,44,000 का भुगतान होना था, लेकिन 11 मार्च 2019 को जारी चेक के माध्यम से मात्र ₹72,400 का भुगतान किए जाने का दावा है।
इस हिसाब से ₹71,600 की राशि का अंतर सामने आता है। ग्रामीणों का कहना है कि शेष राशि आज तक हितग्राहियों को नहीं मिली है।
चेक और भुगतान रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल
ग्रामीणों के पास उपलब्ध दस्तावेज में 11-03-2019 की तारीख से संबंधित भुगतान का रिकॉर्ड मौजूद है। इसी भुगतान को लेकर ग्रामीणों का सवाल है कि जब 12 हितग्राहियों के लिए ₹1,44,000 की राशि बनती थी तो केवल ₹72,400 का भुगतान क्यों किया गया?
इसके अलावा उपलब्ध सूची में भी अलग-अलग हितग्राहियों को अलग-अलग राशि मिलने की जानकारी सामने आई है। किसी हितग्राही को ₹2,900, किसी को ₹6,000, किसी को ₹7,000, किसी को ₹8,000 और किसी को ₹9,000 तक की राशि मिलने की बात कही गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित राशि पूरी नहीं मिलने के बावजूद वर्षों से शेष राशि का भुगतान नहीं किया गया।
हितग्राही का बयान
एक हितग्राही मनीराम एवं भंवर सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर पर शौचालय निर्माण कराया था। शासन की ओर से मिलने वाली पूरी प्रोत्साहन राशि की उम्मीद थी, लेकिन खाते में पूरी राशि नहीं आई। उनका कहना है कि बैंक खाते में वास्तव में कितनी राशि आई और विभागीय रिकॉर्ड में कितनी राशि दिखाई गई है, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक-दो लोगों का मामला नहीं है, बल्कि 12 हितग्राहियों के भुगतान से जुड़ा मामला है। इसलिए सभी हितग्राहियों के बैंक खातों का सत्यापन आवश्यक है।
चितरंजन शर्मा का बयान
चितरंजन शर्मा, कांग्रेस नेता, खोंगसरा ने कहा—
स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक पूरी भुगतान राशि नहीं मिली है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। सीईओ के संज्ञान में मामला होने के बाद भी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और पात्र हितग्राहियों को उनकी शेष राशि दिलाने की मांग की है।
वार्ड पंच राजेश पांडेय का बयान
राजेश पांडेय, वार्ड पंच एवं जनप्रतिनिधि, आमागोहन ने कहा—
मेरे वार्ड में तीन हितग्राहियों को पूरा पैसा भुगतान नहीं हुआ है। शिकायत की जांच भी सही तरीके से नहीं हो रही है।
उनका कहना है कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए जांच अधिकारियों को हितग्राहियों से सीधे मिलकर दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए।
मामले की जांच कर रहे एस.के. यादव, एडीओ कोटा का कहना है
“हम जांच कर रहे हैं। सूची मिलते ही कार्रवाई करेंगे।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का सवाल है कि यदि जांच चल रही है तो हितग्राहियों से सीधे संपर्क कर उनके बैंक खातों और दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया जा रहा है?
पंचायत में बैठकर जांच, ग्रामीणों से सत्यापन नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद जांच अधिकारी ने पंचायत में बैठकर जांच प्रक्रिया पूरी की। ग्रामीणों के अनुसार बिना पर्याप्त क्षेत्र भ्रमण किए तीसरी बार जांच रिपोर्ट तैयार किए जाने की स्थिति सामने आई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच के दौरान प्रभावित हितग्राहियों की प्रतिक्रिया और बयान दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। जबकि इस मामले में बैंक भुगतान, चेक एवं हितग्राहियों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं।
उनका आरोप है कि एस.के. यादव, एडीओ के स्तर पर शिकायतों को पूर्व में भी बंद किया गया, जिसके बाद असंतुष्ट होकर पुनः शिकायत करनी पड़ी। पूरा मामला सीईओ कोटा के संज्ञान में होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं।
सार्वजनिक शौचालय निर्माण पर भी सवाल
ग्राम आमागोहन में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए सार्वजनिक शौचालय को लेकर भी ग्रामीणों ने अलग से अनियमितता के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के बाद सार्वजनिक शौचालय का नियमित उपयोग नहीं हो रहा है और वर्तमान में इसकी स्थिति गंदगी से खराब है।
ग्रामीणों की मांग है कि सार्वजनिक शौचालय की स्वीकृत राशि, निर्माण लागत, भुगतान, गुणवत्ता एवं वर्तमान स्थिति की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्ष 2018 से 2026 तक ग्राम पंचायत आमागोहन में स्वच्छ भारत मिशन के तहत हुए सभी कार्यों और भुगतानों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
जांच के दौरान प्रत्येक हितग्राही के घर जाकर—
शौचालय का भौतिक सत्यापन किया जाए।
हितग्राही का बयान दर्ज किया जाए।
बैंक खाते में प्राप्त वास्तविक राशि की जांच की जाए।
पंचायत एवं विभागीय रिकॉर्ड से भुगतान का मिलान किया जाए।
₹12,000 की निर्धारित राशि और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर की जांच हो।
11 मार्च 2019 के ₹72,400 के चेक भुगतान का पूरा हिसाब सामने लाया जाए।
₹1,44,000 की अपेक्षित राशि और ₹72,400 के भुगतान के बीच ₹71,600 के अंतर की जांच की जाए।
पूर्व में की गई जांच और जांच रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाए।
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा अन्य संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
बड़ा सवाल
12 हितग्राहियों के लिए ₹1.44 लाख की राशि बनती थी, तो 11 मार्च 2019 को ₹72,400 का भुगतान ही क्यों हुआ? ₹71,600 की राशि का क्या हुआ?
अब ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत में बैठकर कागजी जांच के बजाय हितग्राहियों के घर पहुंचकर बैंक रिकॉर्ड, भुगतान अभिलेख और मौके पर बने शौचालयों का संयुक्त भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।


