
*डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी का मामला गरमाया*
*ग्लोबल न्यूज रिपोर्टर ओमप्रकाश नाग कोण्डागांव*
*कोंडागांव: पत्रकारिता की गरिमा तार-तार, डिजिटल मीडिया के अपमान पर प्रेस क्लब ने साधी चुप्पी*
कोंडागांव। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन जब इस स्तंभ के प्रहरी ही आपस में ऊंच-नीच और भेदभाव का खेल खेलने लगें, तो समाज को क्या संदेश जाएगा? मामला कोंडागांव जिले का है, जहां प्रेस क्लब के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी का मामला गरमा गया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, प्रेस क्लब कोंडागांव के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक प्रिंट मीडिया नीरज उइके पत्रकार द्वारा डिजिटल मीडिया (पोर्टल) का सरेआम मजाक उड़ाया गया। उक्त पत्रकार ने मर्यादा लांघते हुए लिखा कि “7000 का पोर्टल बनाकर लोग खुद को संपादक समझने लगते हैं, पहले संपादक का अर्थ जान लें फिर नाम के आगे संपादक लिखें।” इतना ही नहीं, पोर्टल की तुलना ‘गली के क्रिकेट’ से करते हुए प्रिंट मीडिया को ‘रणजी लेवल’ का बताया गया।
विवादित टिप्पणी में ‘नया मुल्ला ज्यादा प्याज खाता है’ जैसे मुहावरों का इस्तेमाल कर डिजिटल मीडिया के पत्रकारों की योग्यता पर सवाल उठाए गए।
जिम्मेदारों का ‘मौन’ खड़ा कर रहा सवाल
हैरानी की बात यह है कि जिस ग्रुप में यह अभद्र टिप्पणी की गई, उसमें प्रेस क्लब के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव समेत कई वरिष्ठ सदस्य मौजूद थे। घंटों तक चले इस अपमानजनक घटनाक्रम के बावजूद किसी भी पदाधिकारी ने आपत्ति नहीं जताई और न ही टिप्पणी करने वाले को रोकने की कोशिश की। प्रेस क्लब की यह चुप्पी अब सवालों के घेरे में है कि क्या संगठन केवल कुछ चुनिंदा लोगों के हितों की रक्षा के लिए है?
अध्यक्ष को सौंपी गई लिखित शिकायत
डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की गाइडलाइंस के बावजूद इस तरह का भेदभाव दुर्भावनापूर्ण माना जा रहा है। इस अपमान के खिलाफ ‘उजाला टुडे’ (UJALA TODAY) के संपादक संजय सोनपिपर ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रेस क्लब के अध्यक्ष को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है।
शिकायत में मांग की गई है कि सार्वजनिक रूप से अपमान करने वाले पत्रकार पर उचित कार्यवाही की जाए। अब देखना यह है कि प्रेस क्लब अपने ही संविधान और पत्रकारिता की गरिमा को बचाने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
डिजिटल मीडिया का बढ़ता आक्रोश
इस घटना के बाद जिले के डिजिटल पत्रकारों में भारी रोष है। पत्रकारों का कहना है कि आज के दौर में डिजिटल मीडिया सबसे तेज और प्रभावी माध्यम है, जिसे सरकार भी मान्यता दे रही है। ऐसे में खुद को ‘रणजी खिलाड़ी’ बताने वाले पत्रकारों की यह संकीर्ण सोच उनकी असुरक्षा की भावना को दर्शाती है।