खोंगसरा आमागोहन ग्लोबल न्यूजछत्तीसगढ़संपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*बैगा  परिवार को पीने के पानी के लिए तरसना पड़ रहा है*

***23 अगस्त दिन शनिवार खोंगसरा ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट***

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*नेता मंत्री जनप्रतिनिधि विकास की बात करते हैं यहां तो विकास कोसों दूर पर है बैगा  परिवार के ऊपर पानी का संकट मंडराया*

!!ग्राम पंचायत  केंवची का मामला बैगा परिवारों को स्वच्छ पानी के लिए तरसना पड़ रहा, गंदा पानी पीने से बच्चों में खुजली की बीमारी फैली!!
कोटा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत केंवची के वार्ड क्रमांक 3 स्थित बैगापारा में निवासरत करीब 25 आदिवासी बैगा परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां पीने के पानी की भारी समस्या है। गांव में एकमात्र हैंडपंप है, वह भी कभी-कभी ही पानी देता है। इसके चलते ग्रामीणों को तालाब और अन्य अस्वच्छ स्रोतों से पानी लाना पड़ता है। गंदे पानी के उपयोग से बच्चों और महिलाओं में खुजली की गंभीर बीमारी फैल चुकी है। कई बच्चों के हाथ-पैर और शरीर पर घाव हो गए हैं, जिनसे खून तक निकल रहा है।

महिलाएं बोलीं – “कई बार अधिकारियों से कहा, पर कोई सुनवाई नहीं हुई

ग्राम की महिलाएं माया बैगा और किरण बैगा बताती हैं कि इस समस्या को उन्होंने कई बार अधिकारियों के समक्ष रखा और साथ ही वार्ड पंच अनिता यादव ने सुशासन दिवस पर भी शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। स्थिति यह है कि बरसात जैसे मौसम में भी पानी की इतनी किल्लत है तो गर्मियों में स्थिति और भयावह हो जाएगी।

गांववासी बुधराम बैगा बताते हैं कि उनके घर के पास एक हैंडपंप है, लेकिन उसमें भी कुछ समय के लिए ही पानी आता है। इसके कारण रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए परिवारों को दूर-दराज से पानी ढोना पड़ता है। यहां के स्कूल में भी बच्चों को स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है।

बच्चों में फैल रही बीमारी

गंदा पानी उपयोग करने से गांव के छोटे बच्चों में खुजली की बीमारी तेजी से फैल गई है। बच्चों के हाथ-पांव और शरीर पर लाल चकत्ते पड़ गए हैं। कई बच्चों की हालत इतनी खराब है कि खून बहने लगता है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर इलाज न मिलने से स्थिति बिगड़ती जा रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता का बयान

हाल ही में सामाजिक कार्यकर्ता किशन लाल ने बैगापारा का दौरा किया। उन्होंने बताया –
“गांव में बच्चों से मिलकर उन्हें पढ़ाई की सामग्री दी गई, लेकिन यह देखकर पीड़ा हुई कि अधिकांश बच्चे खुजली की बीमारी से पीड़ित हैं। साफ पानी के अभाव और गंदे पानी के उपयोग की वजह से यह बीमारी फैल रही है। हमने वहां स्वच्छता को लेकर समुदाय को जागरूक किया। लेकिन यहां तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाना आवश्यक है।”

प्रशासन से मांग

किशन लाल ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि –
बैगापारा में नया हैंडपंप लगाया जाए,
क्रेडा विभाग के सहयोग से पानी का टैंक स्थापित किया जाए,
और गांव में जल्द से जल्द स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया जाए, ताकि बीमार बच्चों को इलाज मिल सके।उपेक्षा का शिकार बैगा परिवार बैगा जनजाति विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) में आती है, जिन्हें सरकार की योजनाओं में विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बावजूद इसके, बैगापारा के परिवार वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं और अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं होती, तो यह प्रश्न उठता है कि क्या आदिवासी अब भी बुनियादी हक से वंचित ही रहेंगे?

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