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कोंडागांवछत्तीसगढ़संपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*रसोइयों का आंदोलन तेज बारिश में भी डटे रहे*

*कोंडागांव ग्लोबल न्यूज ओम प्रकाश नाग की रिपोर्ट*
*तीसरे दिन भी जारी रहा रसोइयों का आंदोलन, तेज बारिश में भी डटे रहे प्रदर्शनकारी, सौंपा ज्ञापन*

,  जिला मुख्यालय कोण्डागांव स्थित डीएनके मैदान में छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोईया संयुक्त संघ द्वारा चलाया जा रहा तीन दिवसीय धरना आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। तेज बारिश के बावजूद कोण्डागांव, केशकाल, माकड़ी, फरसगांव और बड़ेराजपुर ब्लॉक से हजारों की संख्या में रसोइया अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे रहे। प्रदर्शन के तीसरे और अंतिम दिन एसडीएम अजय उरांव को ज्ञापन सौंपा गया।

धरना स्थल पर उपस्थित रसोइयों का कहना है कि वे वर्षों से न्यूनतम मानदेय में काम कर रहे हैं, जबकि अब उनसे पूर्णकालिक कार्य लिया जा रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिलाध्यक्ष सगराम मरकाम, जिला सचिव शंभूलाल मरकाम, जिला कोषाध्यक्ष कुमार सिंह मरकाम और संरक्षक दयालु भारद्वाज सहित संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार के चुनावी वादे के अनुरूप 50 प्रतिशत मानदेय वृद्धि शीघ्र दी जानी चाहिए। इसके साथ ही अंशकालिक से पूर्णकालिक रूप से कार्यरत रसोइयों को कलेक्टर दर पर भुगतान किया जाए और बिना कारण किसी भी रसोइया को कार्य से बाहर न किया जाए।

प्रदर्शन में शामिल रसोइयों ने बताया कि जिले में लगभग 3000 रसोइया वर्षों से मध्यान्ह भोजन योजना को सुचारु रूप से चला रहे हैं। वर्ष 1995 से सेवा में लगे कई रसोइयों से पहले केवल तीन घंटे का कार्य लिया जाता था, किंतु अब पूरे दिन की ड्यूटी के बावजूद उन्हें मात्र 60 रुपए प्रति दिन के दर से मानदेय मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कलेक्टर दर पर भुगतान संभव नहीं है तो इतना मानदेय अवश्य दिया जाए जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा सकें, आज सरकार के किसी भी कर्मी को 60 रुपए का भुगतान नहीं होता हैं।

इधर, जिला में संचालित स्कूलों की बात करें तो, बीते दो दिन से मध्यान भोजन नहीं बन पाया। कुछ जगहों पर बच्चों को सूखा राशन या वैकल्पिक खाद्य सामग्री वितरित की गई, जबकि अन्य स्कूलों में स्व सहायता समूहों के माध्यम से भोजन तैयार कराया गया। रसोइयों की चेतावनी है कि यदि उनकी मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो यह आंदोलन आगे चलकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रूप ले सकता है, जिससे स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना पूरी तरह से ठप हो सकती है।

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