
*आदिवासी समाज में नई चेतना का संचार*
अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट
आदिवासी समाज में नई चेतना का संचार – प्रकाश उइके बने भारतीय आदिमजाति सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष
अधिकारों की रक्षा हेतु लीगल सेल की पहल,देशभर से मिल रही शुभकामनाएं
अमरकंटक – भारतीय आदिमजाति सेवक संघ ने नई ऊर्जा और दूरदृष्टि के साथ अपने आगामी सफर का श्रीगणेश किया है । राजधानी दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व न्यायाधीश प्रकाश कुमार उइके को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया । इस निर्णय से आदिवासी समाज में एक नई आशा और जागरूकता की लहर प्रवाहित हुई है ।
संगठन जो अपने गौरवशाली इतिहास और सेवा-समर्पण की परंपरा के लिए जाना जाता है । अब उइके के नेतृत्व में और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है । बैठक के दौरान कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए विभिन्न पदों पर अनुभवी व्यक्तित्वों को दायित्व सौंपे गए है । महासचिव अजय कुमार चौबे ने संगठन की स्थापना का उल्लेख करते हुए बताया कि यह महात्मा गांधी की प्रेरणा से ठक्कर बापा (अमृतलाल ठक्कर) द्वारा स्थापित किया गया था जिसने समय-समय पर समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है ।
अपने संबोधन में नवनियुक्त अध्यक्ष प्रकाश कुमार उइके ने कहा कि आदिवासी समाज को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है । उन्होंने इसके लिए एक सशक्त लीगल सेल के गठन की घोषणा की जो आदिवासियों को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा ।
इसी क्रम में देशभर से उन्हें बधाइयों का सिलसिला भी निरंतर जारी है ।
अमरकंटक इकाई की ओर से संयोजक संरक्षक भास्कर रमण , अध्यक्ष आलोक तिवारी , कार्यकारी अध्यक्ष धनंजय तिवारी , सचिव अभिलाषा पांडेय , देवेंद्र कौशिक , श्रीमती देवकी धुर्वे , गुरप्रीत सिंह लकी , ओ.जी. गोस्वामी , लाल सिंह धुर्वे , श्रीमती ललिता पटेल सहित अन्य सदस्यों ने हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं ।
सभी ने समवेत स्वर में कहा कि प्रकाश कुमार उइके के नेतृत्व में भारतीय आदिमजाति सेवक संघ निश्चित ही नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और आदिवासी समाज के उत्थान में और अधिक प्रभावी भूमिका निभाएगा ।
इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिनिधियों ने भी नए नेतृत्व के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए संगठन के उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।

