
*मतदान दलो की दर्द भरी दास्तान*
*ग्लोबल न्यूज रिपोर्टर ओमप्रकाश नाग की रिपोर्ट कोंडागांव से*
*मतदान दलो की दर्द भरी दास्तान*
*इस बार नक्सलियो से ज्यादा जिलानिर्वाचन अधिकारियो ने परेशान किया*
कोण्डागांव दिनांक 6/11/2023-: मै 2008 से अब तक चुनाव ड्यूटी किया,पर इतना दबावपूर्वक प्रशिक्षण, जानकारी कभी नहीं लिया और ना ही सुना था,,इस बार मेरा ड्यूटी बिना प्रशिक्षण के सेक्टर अधिकारियों को सामग्री वितरण के कांउटर प्रभारी के रूप में था,,हम सब हरकतें, को देख रहे थे,, चुनाव दल को सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जाने के लिए दहशत बना रहता है,, कैसे पहुंचेंगे,कब वापसी होगी,,तरह तरह की बातें सोचते रहते हैं,, बस्तर संभाग में यह दहशत बना रहता है,,इस बार सभी दल की सुरक्षित समय पर वापसी हुई,,,समय पर वापसी के बाद भी जमा करने की प्रक्रिया को पूर्ण करने के बावजूद भी मतदान दलों को अनावश्यक रूप से परेशानी किये हैं,, और लगभग सभी दलों को प्रताड़ित जैसे किये हैं,, सभी दल मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे थे,, चुनाव ड्यूटी में ज्यादातर सीनियर कर्मचारियों और नये भी रहते हैं,, ज्यादातर पीठासीन अधिकारी अनुभवी ही रहते हैं,,,तो ज्यादा दिक्कत नहीं होनी चाहिए था,, फिर भी इस बार के विधानसभा चुनाव में सबका हालत खराब हो गया था,,जमा करो,, फिर वापस, फिर जमा करो ऐसा ही काम चला है,, कुल मिलाकर सभी कर्मचारियों के चेहरा में परेशानी और मायूसी दिख रहा था,, परेशानी का कारण,, सभी अधिकारी और कर्मचारी समझ चुकें हैं,,कि कौन-कौन परेशान कर रहें हैं,,,हम बस्तर वासियों को समझने की जरूरत है,, इस बार यहां पर नक्सली परेशान नहीं किये तो जिला निर्वाचन अधिकारियों के द्वारा परेशान किया गया,, घटना का कारण लेट से सामग्री जमा कर घर वापस लौटना,,, इसलिए तीनों मृतजनों के परिवार को उचित मुआवजा मिले और परिवार में एक -एक व्यक्ति को शासकीय नौकरी मिलना चाहिए,, क्यों की चुनाव ड्यूटी में थे,, चुनाव तत्काल,,अब चुनाव निर्वाचन आयोग मृत परिवार पर कहां तक सहयोग प्रदान करेगी????