*ब्रेकिंग न्यूज़ प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट बाल आयोग ने लिया संज्ञान DEO बिलासपुर से मांगी जांच रिपोर्ट*

*खोगसरा ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की ग्राउंड रिपोर्ट*

विकासखंड कोटा के अंतिम आदिवासी ग्राम पंचायत टाटीधार के प्राथमिक शाला मुसियारी का मामला
*नाबालिग बालिका से मारपीट के मामले में बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान*
*डीईओ बिलासपुर को पत्र जारी कर मांगी विस्तृत जांच रिपोर्ट 22 अक्टूबर तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश*
बिलासपुर/कोटा समाचार कोटा विकासखंड कोटा के अंतिम आदिवासी ग्राम पंचायत टाटीधार के प्राथमिक शाला मुसियारी में नाबालिग छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा कथित मारपीट एवं शारीरिक दंड दिए जाने के मामले में अब छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया है।
आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को पत्र जारी कर घटना की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि व्हाट्सऐप के माध्यम से प्राप्त शिकायत एवं तस्वीरों के आधार पर कोटा विकासखंड स्थित प्राथमिक शाला मुसियारी में नाबालिग छात्रा के साथ शिक्षक द्वारा कथित मारपीट और विद्यालयीन समय में शराब सेवन के आरोप आयोग के संज्ञान में आए हैं।
आयोग ने बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13(ज) एवं 14 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए डीईओ को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित बच्ची के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी तथा घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट आयोग कार्यालय में 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे तक प्रस्तुत की जाए।
आयोग ने यह भी कहा है कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
क्या है पूरा मामला
पालक द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार कोटा ब्लॉक के प्राथमिक शाला मुसियारी में कक्षा 3 की एक नाबालिग छात्रा के साथ शिक्षक ने कान पकड़कर जोर से ऊपर उठाया और ऐंठा, जिससे कान में चोट और खून निकलने की बात सामने आई। पालक का आरोप है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की घटना हुई थी। शिक्षक से बात करने पर उन्होंने बच्ची को पढ़ने में पीछे होने के कारण सजा देने की बात स्वीकार की थी।
आयोग के पत्र की प्रति आवेदक प्रदीप शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार जिला बिलासपुर को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। बाल संरक्षण की दृष्टि से नाबालिग बच्ची की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
