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*अमरकंटक के मुख्य मार्ग सरस्वती शिशु मंदिर एवं शिव गोपाल आश्रम के सामने भरता है वर्षा का जल*

अमरकंटक ग्लोबल न्यूज – श्रवण कुमार उपाध्याय की रिपोर्ट

अमरकंटक के मुख्य मार्ग सरस्वती शिशु मंदिर एवं शिव गोपाल आश्रम के सामने भरता है वर्षा का जल ,

पर्यटकों , यात्रियों व राहगीरों को होती है भारी परेशानी 

अमरकंटक – मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक में नगर परिषद द्वारा कराए गए सीमेंट सड़क निर्माण कार्य की तकनीकी खामियां अब वर्षा ऋतु में स्पष्ट रूप से सामने आने लगी हैं । पुराने स्टेट बैंक शाखा कार्यालय एवं कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय के मध्य से पुलिस थाना तथा पुराने पाल बंगला वर्तमान कलेक्टर निवास तक केंद्र सरकार की हुडको योजना से लगभग 6 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सीमेंट सड़क पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।
विशेष रूप से सरस्वती शिशु मंदिर एवं शिव गोपाल आश्रम के सामने तथा दीन दयाल चौक  सड़क पर वर्षा का पानी लगभग एक से डेढ़ फुट तक भर जाता है । परिणामस्वरूप पर्यटक , तीर्थयात्री , स्कूली छात्र-छात्राएं एवं पैदल राहगीरों को आवागमन में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । कई बार वाहन चालक पानी भरे गड्ढों का अनुमान नहीं लगा पाते  जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है ।
नाका चौराहे पर भी वर्षा का जल जमाव लगातार बना रहता है जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है तथा आमजन को भारी परेशानीया झेलनी पड़ती है । स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण के प्रारंभिक समय से ही तकनीकी विसंगतियां दिखाई दे रही थीं किंतु संबंधित विभाग एवं प्रशासन द्वारा इस दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई ।
नगर परिषद अमरकंटक द्वारा कराए गए इस बहुचर्चित निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर अब स्थानीय स्तर पर प्रश्न उठने लगे हैं । नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से निर्मित सड़क यदि कुछ ही वर्षों में जलभराव जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न कर दे तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं तकनीकी परीक्षण पर सवाल उठना स्वाभाविक है ।
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन एवं जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया  किंतु आज तक न तो स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी पहल की गई और न ही निर्माण एजेंसी अथवा ठेकेदार को आवश्यक सुधार एवं मरम्मत हेतु कठोर निर्देश दिए गए ।
अब क्षेत्रवासियों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि तकनीकी खामियों से युक्त इस सड़क निर्माण के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है — संबंधित उपयंत्री, तकनीकी अमला अथवा निर्माण एजेंसी । नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात के मौसम को देखते हुए तत्काल जल निकासी की समुचित व्यवस्था कर सड़क की तकनीकी खामियों को दूर कराया जाए ताकि आमजन , श्रद्धालुओं एवं विद्यार्थियों को राहत मिल सके ।

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