*बिना जांच के आरक्षक हुआ लाइन अटैच*

*रामनारायण यादव की विशेष रिपोर्ट******चौकी प्रभारी बेलगहना के आदेश पर हुई रेत पर कार्यवाही
करने की सजा छोटे कर्मचारी को भुगतना पड़ा और आरक्षक को होना पड़ा लाइन अटैच*
*बिलासपुर एसपी के पास फर्जी शिकायत पर बिना जांच के आरक्षक को किया लाइन अटैच अब यह देखना है कि फर्जी शिकायत करने वाले पर क्या कार्रवाई होती है*
बिलासपुर जिले के पुलिस विभाग में बड़ी से बड़ी उपलब्धियां देखने को मिलती हैं जहां पर आरक्षक हवलदार व निचले क्रम के कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है एवं उच्च अधिकारियों का आदेश का पालन करना सर्वोपरि होता है। वहीं गजब का किस्सा बेलगहना चौकी में देखने को मिल रहा है अभी कुछ दिन पहले बेलगहना चौकी प्रभारी को शिकायत मिली की टेंगनमाडा क्षेत्र में अवैध रेत निकाल कर बेचा जा रहा है जिस पर चौकी प्रभारी ने गस्त दल को उक्त क्षेत्र पर कार्यवाही हेतु भेजा गस्त दल के सदस्यों ने शिकायत के आधार पर उक्त ट्रैक्टर चालक एवं ट्रैक्टर को पड़कर बेलगहना चौकी प्रभारी के दिशा निर्देश पर उक्त ट्रैक्टर पर खनिज विभाग को प्रतिवेदन बनाकर कार्यवाही करने हेतु भेजा गया जिस आवेदन पर चौकी प्रभारी बेलगहना शील लगाकर साइन किया उसके पश्चात गांव के ही लोगों के द्वारा उक्त मामले पर लेनदेन का आरोप लगाकर पुलिस कप्तान बिलासपुर को शिकायत की गई की रेत मामले पर गाली गलौज देकर पैसे की मांग गस्त दल के एक आरक्षक सत्येंद्र सिंह के द्वारा दुर्व्यवहार किया गया इतना सुनते ही पुलिस कप्तान ने उक्त आरक्षक सत्येंद्र सिंह राजपूत को लाइन अटैच कर दिया गया अब सोचने वाली बात यह है की कार्यवाही करने के लिए चौकी प्रभारी बेलगहना ने आदेश दिया और उक्त ट्रैक्टर पर खनिज विभाग को कार्यवाही करने के लिए जो प्रतिवेदन सौपा गया उस पर थाना प्रभारी का साइन होने के बाद आरक्षक पर लाइन अटैच का गाज गिरना यह सोचने के लिए मजबूर करता है की कार्यवाही नहीं करने पर सजा मिलती है और कार्यवाही कर देने के बाद उसे भी सजा मिलती है तो आरक्षक उच्च अधिकारियों का कहना माने या ग्रामीणों के दबाव में आकर उल्टे पांव वापस आ जाए कानून के रखवालो के साथ यदि कानून ही शक्ति से पेश आएगा तो कैसे आप उम्मीद कर सकते हैं कि कानून के रखवाले ईमानदारी से काम कर पाए आज एक शिकायत पर लाइन अटैच की गाज गीरी कल कोई दूसरा आरक्षक इस फंदे में फंस जाएगा इसलिए पुलिस कप्तान को इस पूरे मसले पर जांच करवानी चाहिए और यदि गलती आरक्षक की है तो वास्तव में उसे सजा मिलनी चाहिए और नहीं तो ऐसे झूठे शिकायतकर्ताओं पर भी कार्यवाही होनी चाहिए

