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कांकेर

*क्रेडा में चल रहा है अंधा कानून अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा है*

क्रेडा में चल रहा है अंधा कानून अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा है

*बिप्लब कुण्डू की रिपोर्ट*

*पखांजूर-कांकेर ग्लोबल न्यूज़*
कांकेर जिला के परलकोट कहें जानेवाली क्षेत्र जहां अधिकारियों की लापरवाही कहें या सपोट के कारण शासन की बेहतर योजना हो रही बदनाम।

ब्लाक के कई गांवों में रूर्बन मिशन योजना लागू है। इन गांवों के चौक-चौराहों पर क्रेडा विभाग ने हाईमास्ट सोलर लाइट लगा रही है,
हाईमास्ट सोलर लाइटें इस लिए लगाई जाती है।
ताकि पंचायतों को स्ट्रीट लाइट में भारी भरकम बिजली बिल पटाना न पड़े। ठीक इसी तरह शासन प्रत्येक गांवों के प्रमुख चौक-चौराहों पर हाईमास्ट लाईट लगाए, ताकि जरूरत पड़ने पर ग्रामीण इस लाईट का उपयोग कर सकें। लेकिन यहां क्रेडा विभाग में चल रहा है अंधा कानून अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा है ठेकेदार की मनमानी।
सौर ऊर्जा को भ्रष्टाचार का घुन खाये जा रहा है। घुन और कोई नहीं वहां के कर्ताधर्ता ही है। क्रेडा के अधिकारी चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाकर लाखों रुपए की कमीशन खाने के चक्कर में है। ठेकेदारों से मिली भगत कर ये क्रेडा को चूना लगाने में पीछे नहीं है। यहां ऐसा हो गया जैसे नाम जपना पराया माल अपना। क्रेडा का एक चौकाने वाला मामला फिर से आया है जहां पर एस्टीमेट के आधार से काम नहीं हो रहा है ठेकेदार अपना मनमर्जी काम कर रहा है जहां10एम,एम का सरिया लगनी है वहां 8एम एम का लगाकर और जहां पिलिंत ढालकर जाली डालकर कालम खड़ी करना है वहां एक साथ जाली और कालम को खडेकरके ढलाई दिया जा रहा है ये सिर्फ यहां का मामला नहीं है पुरी परलकोट का मामला है जहां संबंधित अधिकारी कर्मचारी ठेकेदार के साथ सांठगांठ कर काम करवा रहे हैं।
कार्य स्थल में नही रहते विभागीय अधिकारी ना कर्मचारी ठेकेदार कर रहा है मनमर्जी ठेकेदार का एस्टीमेट और विभाग का एस्टीमेंट में अंतर ऐसा क्यों?

विधायक निधि से बन रही यह सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट की लाईट जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि भी झांकने तक नहीं आये क्या जनप्रतिनिधि भी जनता की हितैषी नहीं बन पा रहे हैं क्या ठेकेदार की चंदा उन तक भी पहुंच गया है। क्यो अधिकारी कर्मचारी ठेकेदार पर मेहरबान।
सरकारी काम में अधिकारियों की उदासीनता किस कदर भारी पड़ती है, यहां देखने को मिलेगा। क्रेडा विभाग से
गांवों को सौर ऊर्जा से रौशन किया जा रहा है। विभिन्न स्थानों में हाईमास्ट लाइट लगाई जा रही है। जिसकी ऊंचाई नौ मीटर है, जिससे 40 मीटर दूर तक रोशनी की फैलाव होने की दावा सरकार करती है। लेकिन अंदरूनी गांवों को सौर ऊर्जा से रौशन करने की सरकार की योजना क्रेडा विभाग की लापरवाही का शिकार होकर रह जाती है। क्योंकि कि अधिकारी कर्मचारीयों की उदासीनता से ठेकेदार मनमर्जी काम कर आनन-फानन में निर्माण कर अपना बोरिया बिस्तर लेकर चल पड़ता है और विभाग काली काली अक्षरो में फाईलों में शो कर देती । जो कुछ दिनों में शोपीस बनकर रह जाती है।
इस तरह के कई मामले हैं।जो आज कई चौंक चौराहे पर धुल खाते नजर आती है।।ऐसे कैसे कहें भला यह योजना सफल है।

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