
*शिवनाथ सूखा, फसल बचाएं या पानी—धर्मसंकट गहराया*
*भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट****


*शिवनाथ सूखा, फसल बचाएं या पानी—धर्मसंकट गहराया*
भाटापारा 19 अप्रैल
सदानीरा मानी जाने वाली शिवनाथ नदी इस बार गर्मी में सूखने की कगार पर है। हालात इतने खराब हैं कि नदी के कई हिस्सों में पानी नजर नहीं आ रहा। इसका बड़ा कारण गर्मी में फसलों के लिए किया जा रहा जल दोहन और उद्योगों की जल खपत है। लगातार उपेक्षा के चलते अब स्थिति विकराल हो गई है। प्रशासन की कोशिशें भी नाकाफी साबित हो रही हैं। शिवनाथ की बिगड़ती हालत के पीछे दोहन की समस्या अहम है। लंबे समय से नदी से अवैध रेत उत्खनन हो रहा है। इसके साथ ही गर्मी में फसलों के लिए भारी मात्रा में पानी लिया जा रहा है। उद्योगों की जल खपत भी कम नहीं है। इन सब कारणों से नदी का जलस्तर तेजी से गिरा है। इस बार की भीषण गर्मी ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। अब स्थिति ऐसी बन गई है कि जल संरक्षण और फसल बचाने के बीच धर्मसंकट खड़ा हो गया है। फसलें आधी पक चुकी हैं। ऐसे में अगर जल दोहन पर रोक लगाई जाती है तो फसल को नुकसान होगा। दूसरी ओर, अगर दोहन जारी रहा तो पेयजल संकट गहरा सकता है। टोहड़ीघाट भी सूख सकता है, जहां से भाटापारा को पानी मिलता है। ऐसे में प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है कि किसे प्राथमिकता दी जाए—फसल को या लोगों के पीने के पानी को। यह स्थिति कोई अचानक नहीं बनी। इसकी आहट पहले से मिल रही थी। अगर समय रहते जल दोहन पर नियंत्रण किया जाता, किसानों को कम पानी वाली फसलें उगाने के लिए प्रेरित किया जाता और अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती होती, तो आज यह हालात नहीं बनते। अब भी समय है कि आने वाले वर्षों के लिए तैयारी शुरू की जाए। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस साल तो संकट झेलना ही पड़ेगा, लेकिन भविष्य में इससे बचने के लिए अभी से कदम उठाने होंगे। गर्मी में धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की जगह कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना होगा। अवैध रेत उत्खनन पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। उद्योगों की जल खपत पर गर्मी के दिनों में पूरी तरह रोक लगानी होगी। तभी शिवनाथ को बचाया जा सकेगा और पेयजल संकट से निपटा जा सकेगा।