*रेल लाईन क्रॉस करते हुए आज सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी के पत्नी(विधवा) को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी।*


*खोगसरा ग्लोबल न्यूज प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट*खोगसरा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का कटनी रूट में रेलवे स्टेशन एक ऐसा स्टेशन है लाइन दोहरीकरण का कार्य तो हो गया लेकिन रेलवे स्टेशन की अनदेखी की वजह से यात्री सुविधा को ध्यान में रखते हुए आर पार जाने के लिए पैदल पुल नहीं बनाया गया है जिससे एक नंबर प्लेटफार्म से दो नंबर प्लेटफार्म में जाया जा सके रेलवे प्रशासन के द्वारा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने एवं यात्रियों के साथ सुरक्षा और सुविधा से खिलवाड़ कर रही है इस रेलवे स्टेशन में पिछले 7माह से चल रहे पैदल पुल का निर्माण गुणवत्ता विहीन कराया जा रहा है भविष्य मे दुर्घटना घटना की संभावना है उक्त आरोप खोगसरा ग्राम वासियों एवं जनप्रतिनिधियों के द्वारा बताया गया साथ ही पैदल पुल का रेलवे द्वारा हाई टेंशन तार का ब्लॉक न मिलने से लगभग 3 महीने से अधूरा है यात्री अपनी जान को जोखिम में डालकर लाइन को पार कर रहे हैं जिसकी शिकायत खोगसरा जनपद सदस्य के द्वारा एवं सरपंच खोगसरा के द्वारा मंडल प्रबंधक जनरल मैनेजर दक्षिण पूर्वी मध्य रेलवे बिलासपुर में किया गया है उसके बाद भी आज तक इस रेलवे स्टेशन की ओर रेलवेअधिकारियों का ध्यान नहीं गया है उक्त ओवरब्रिज का निर्माण बहुत पहले से शुरू किया गया जो आज तक पूर्ण नहीं हो पाया जिसकी वजह से लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करते हैं इसमें समस्त नगर वासी एवं जनमानस खोगसरा सरपंच गिरजा बाई पोर्ते के द्वारा रेलवे मंडल को लिखित शिकायत 23/11/ 2023 को की गई थी पैदल पुल नहीं बनने के कारण एक रेलवे गैंगमैन स्वर्गीय घासीराम की पत्नी अरगसनी बाई उम्र 59 साल महिला की जान चली गई जो मालगाड़ी से नीचे से गुजर कर प्लेटफार्म नंबर दो में जा रही थी पेंड्रा दुर्गा मंदिर दर्शन के लिए तभी मालगाड़ी चल पड़ी जिससे उसकी मौत हो गई जन प्रतिनिधि समाजसेवक प्रदीप शर्मा ने यह भी मांग की थी कि यहां पर आर पी एफ के दो जवानों को तैनात कर दिया जाए ताकि रेलवे ट्रैक पार करने वाले को मना किया जा सके जिससे दुर्घटना होने से लोग बच जाए। स्कूल,बैंक, अस्पताल समस्त जरूरी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को आना-जाना होता है। ऐसे स्थिती में रेलवे को कई गुना लाभ देने के बाद भी बिलासपुर जोन के समस्त स्टेशनों में यात्री सुविधाओ की कमीं है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के लगातार पैदल पुल की मांग को दरकिनार किया गया।

