
*आस्था के सर्वोच्च पायदान पर गौवंश है विराजमान*
भाटापारा ग्लोबल न्यूज जुगल किशोर तिवारी की रिपोर्ट
*पशु नही माता स्वरुप का गौवंश को प्राप्त है सम्मान*
*सरयू साहित्य परिषद ने कहा राष्ट्रीय पशु की मांग उचित नहीं आचार्य को सौंपा ज्ञापन*
भाटापारा 31 मई/सनातन संस्कृति मे सर्वोच्च सम्मान प्राप्त गौवंश की दिनोदिन बिगड़ती एवं दयनीय होती स्थिति समूचे जनमानस के लिए चिंता एवं पीड़ा का सबब बनती हुई प्रतीत हो रही है, जिसकी बानगी विभिन्न प्रयासों एवं अभियानों के माध्यम से स्पष्ट रुप से दिखाई दे रही है,गौवंश की दुर्दशा से मुक्ति की अभिलाषा का आलम इस स्तर पर पंहुच गया है कि जनमानस चाहता है कि किसी भी स्वरुप मे हो गौवंश को संवर्धन एवं संरक्षण प्राप्त होना चाहिए।
राष्ट्रीय पशु घोषित करने की उठती मांग
गौवंश को समुचित संवर्धन संरक्षण एवं सम्मान के लिए लंबे समय से विभिन्न अभियानों का आगाज हो रहा है लेकिन गौवंश की स्थिति मे कोई खास बदलाव के परिदृश्य नजर नहीं आये है,इसी कड़ी मे एक नयी मांग जनमानस की ओर से उठती हुई प्रतीत हो रही है जिसके तहत गौवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की जा रही है,इसके पीछे जन आशा यह है कि राष्ट्रीय पशु घोषित हो जाने से गौवंश को संरक्षण मिलेगा गौ मांस तस्करी मे रोक लगेगी एवं गौहत्या बंद होगी।सरयू साहित्य परिषद ने कहा मांग उचित नहीं नगर की रचनात्मक संस्था सरयू साहित्य परिषद भी गौवंश की दुर्दशा से पीड़ा का अनुभव करते हुए पीड़ा का निदान चाहती है लेकिन परिषद यह भी चाहती है कि गौवंश का सम्मान भी प्रभावित न हो इसी के तहत परिषद का कहना है कि तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की वास स्थली माने जाने वाली गौवंश को माता का सर्वोच्च दर्जा प्राप्त है जो उसे पशु श्रेणी से अलग करती है इसीलिए राष्ट्रीय पशु की मांग उचित नहीं है, उपरोक्त भाव व्यक्त करते हुए परिषद के सदस्यों द्वारा व्याख्यान दिवाकर आचार्य झम्मन शास्त्री से मुलाकात की गयी एवं इसी आशय का ज्ञापन सौंपते हुए इस दिशा मे जनमानस को मार्गदर्शन का आग्रह किया गया।
आचार्य झम्मन शास्त्री की अभिव्यक्तिगाय समूचे विश्व की माता है एवं देवताओं की वास स्थली है तथा गौवंश की यही विशेषता उसे पशु श्रेणी से अलग करती है, एवं आस्था का सर्वोच्च स्थान प्रदान करती है। उस सम्मान का भी संरक्षण आवश्यक है, उपरोक्त विचार व्यक्त करते हुए आचार्य झम्मन शास्त्री द्वारा गौवंश की दुर्दशा पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके निदान के लिए ठोस प्रावधान एवं कानून की आवश्यकता पर बल दिया गया जिससे गौवंश पर अत्याचार बंद हो सके गौ मांस तस्करी रुके बुचड़खाने समाप्त हो एवं गौ हत्या बंद हो। ज्ञापन सौंपने मे मुकेश शर्मा हरिहर शर्मा,डाॅ वाय पी सोनी,गिरधर गोपाल शर्मा,राजू तिवारी,आर्यन स्वर्णकार मोनू मानिक प्रसाद दुबे आदि प्रमुख रुप से उपस्थित थे

