
*परिवर्तन योगेश संस्थान की 36वीं सुदर्शन सभा संपन्न 40 से अधिक विद्वान सम्मानित*

*नई दिल्ली ग्लोबल न्यूज ब्यूरो की रिपोर्ट*
*परिवर्तन योगेश संस्थान की 36वीं सुदर्शन सभा संपन्न: 40 से अधिक विद्वान सम्मानित।*
*अध्यक्षता श्री श्री 1008 निरंकारनंद जी महाराज (पीठाधीश्वर: महर्षि सत्य सनातन अखाड़ा) ने किया।
नई दिल्ली | 20 फरवरी, 2026
राजधानी दिल्ली में परिवर्तन योगेश संस्थान एवं महर्षि सत्य सनातन अखाड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ’36वीं सुदर्शन सभा’ आध्यात्मिक चेतना और राष्ट्रभक्ति के संगम के रूप में संपन्न हुई। 19 फरवरी को आयोजित इस भव्य सभा में देश भर के प्रख्यात संतों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने शिरकत की, जहाँ राष्ट्र-धर्म और संस्कृति के पुनरुत्थान का संकल्प लिया गया।
प्रमुख संतों एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
सभा की अध्यक्षता और सानिध्य प.पू.स. ॐ ब्रह्मचैतन्य उदयनाथ महाराज (पीठाधीश्वर: श्री क्षेत्र मुक्तिपीठ) तथा श्री श्री 1008 निरंकारनंद जी महाराज (पीठाधीश्वर: महर्षि सत्य सनातन अखाड़ा) ने किया। मुख्य अतिथियों में आचार्य महंत श्री डॉ. विवेक गुरु जी, आत्मानंद महाराज जी (तारण पंथ), और डॉ. हरीश मिश्र शामिल रहे। इनके साथ ही काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलपति डॉ. संभाजी राजाराम बाविस्कर एवं उप-कुलपति डॉ. योगेश तरेहन ने भी सभा की शोभा बढ़ाई।
विद्वानों का सम्मान और मानद उपाधियाँ,
कार्यक्रम के दौरान संस्थान द्वारा समाज और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को 7 प्रमुख संस्थागत सम्मान प्रदान किए गए:
सहज छीपा: छत्रपति शिवाजी बालवीर पुरस्कार
उदयनाथ महाराज: परम गुरु उपाधि सम्मान
आत्मानंद महाराज: अंतर्राष्ट्रीय संत उपाधि सम्मान
निरंकारनंद महाराज: तक्षशिला विद्वता सम्मान
डॉ. हरीश मिश्र: सनातन गौरव सम्मान
हीरा सिंह धनिक: हिन्दू राष्ट्र रत्न सम्मान
आचार्य डॉ. देव कुमार पाण्डेय: ज्योतिष रत्न
इसके अतिरिक्त, 8 विद्वानों को ‘विद्या सागर’ तथा 27 विद्वानों को ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधियों से अलंकृत किया गया। सम्मानित होने वालों में डॉ. प्रेमचंद शर्मा ‘स्वतंत्र’, डॉ. नवदीप जोशी, डॉ. दानिश परवेज और डॉ. हिमांशु शर्मा सहित देश के विभिन्न प्रान्तों के शिक्षाविद् शामिल रहे।
साहित्यिक संगम और वैचारिक सत्र
सभा में वैचारिक चेतना को धार देते हुए दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया:
‘अग्नि बनो’ – लेखिका डॉ. भावना शर्मा
‘विरह’ – लेखक डॉ. प्रशान्त शर्मा
डॉ. राकेश कुमार आर्य के ओजस्वी बौद्धिक संबोधन ने सभासदों को राष्ट्र धर्म सर्वोपरि की भावना से ओतप्रोत कर दिया। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति की प्राचीन विरासत को आधुनिक संदर्भों में सहेजने पर बल दिया।
सफल आयोजन की व्यवस्था टीम,
समारोह को सफल बनाने में संजय शर्मा, राजेश कुमार सौंखिया, आनंद जिंदल, राकेश कुमार, डॉ. टीकम सिंह और सुनील दुग्गल सहित व्यवस्था समिति के अन्य सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। सभा के अंत में संस्थापक डॉ. योगेश तरेहन ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

