कांकेरकोंडागांवसंपादक हरीश चौबेसबसे पहले सबसे आगे न्यूज

*छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में स्थानीय संस्कृति को शिक्षा से जोड़ने की पहल*

*कोंडागांव से ग्लोबल न्यूज रिपोर्टर ओमप्रकाश नाग की रिपोर्ट*


*छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में स्थानीय संस्कृति को शिक्षा से जोड़ने की पहलश मुख्यमंत्री को भेजा पत्र,विद्यार्थियों को लोक संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों से जोड़ने की मांग*

कोंडागांव, 09 जुलाई 2026, जो समाज अपनी संस्कृति को नहीं सहेजता, वह अपने गौरवशाली इतिहास और अपनी जड़ों से दूर हो जाता है इसी सोच को रखते हुए बस्तर विकास एवं सेवा संस्थान द्वारा संचालित बस्तर संस्कृति ग्रुप (लोकरंग) के संयोजक सिद्धार्थ महाजन ने मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन के नाम पत्र प्रेषित किया है पत्र में राज्य के सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं एवं स्थानीय त्योहारों पर नियमित जागरूकता एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संचालित किए जाने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत, लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों के कारण पूरे देश में अलग पहचान रखता है। लेकिन बदलती जीवनशैली, आधुनिक तकनीक और मोबाइल संस्कृति के प्रभाव से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। यदि समय रहते विद्यालय स्तर पर सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से अनभिज्ञ रह जाएंगी।

विद्यालयों में हरेली, पोला, तीजा, छेरछेरा, मड़ई, बस्तर दशहरा, नवाखाई, गोंचा जैसे प्रमुख पर्वों का महत्व विद्यार्थियों को बताया जाए। साथ ही पंथी, राउत नाचा, सुआ, करमा, गेंड़ी, पंडवानी, ददरिया, लोकगीत, ढोकरा शिल्प, बांस एवं लकड़ी की हस्तकलाओं तथा जनजातीय संस्कृति का व्यावहारिक परिचय भी कराया जाए।



इसके अलावा विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना विकसित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ एवं देश के वीर शहीदों और महान विभूतियों के जीवन पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।



और यह भी मांग की गई है कि प्रत्येक विद्यालय में प्रतिमाह “अपनी संस्कृति–अपनी पहचान” विषय पर सांस्कृतिक परिचय कार्यक्रम, लोक कलाकारों के व्याख्यान, लोक कला प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं एवं जनजातीय संस्कृति आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएं। इससे विद्यार्थियों में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संरक्षण की भावना मजबूत होगी।

सिद्धार्थ महाजन ने राज्य शासन से इस विषय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर पूरे प्रदेश के विद्यालयों में नियमित सांस्कृतिक गतिविधियां प्रारंभ करने का आग्रह किया है। साथ ही प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा मंत्री को भी प्रेषित की गई है

Latest
*ध्यान कुटि जर्जर  देखरेख के अभाव में ढह रहीं * *रामघाट पर टैक्सी यूनियन ने चलाया स्वच्छता अभियान* *बिल्हा के शिक्षाविद् जितेश अग्रवाल को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक सम्मान* *राहुल गांधी के समर्थन में कांग्रेस का प्रदर्शन तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन*
*भाटापारा में विकास की सौगात एक साथ 3 वार्डों में 47.19 लाख के कार्यों का भूमिपूजन*


...
रविवार को रंगीन थे सीएमओ साहब पीएनबी के सामने खंभे से टकराई गाड़ी* *मां चंडी मंदिर शीतला मैया मंदिर में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित* *मारवाड़ी राधाकृष्ण मंदिर से अग्रसेन भवन तक भक्ति का रेला ऐतिहासिक शोभायात्रा* *कल्याण सेवा आश्रम से   108 कन्याओं ने कलश धारण कर बढ़ाई शोभा* *नगर साहू समाज भाटापारा के कार्यकारिणी
की घोषणा है*